
दर्द से परेशान युवक के पेट से ऑपरेशन करके निकाली गई वोदका की बोतल, डॉक्टर्स भी हैरान
AajTak
पीड़ित व्यक्ति को पांच दिन पहले एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था और बोतल को सफलतापूर्वक निकालने के लिए ढाई घंटे की सर्जरी की गई थी. एक डॉक्टर ने बताया, "बोतल से उसकी आंत फट गई थी, जिससे मल का रिसाव हो रहा था और उसकी आंतों में सूजन आ गई थी, लेकिन अब वह खतरे से बाहर है."
नेपाल में एक 26 वर्षीय व्यक्ति के पेट से वोदका की बोतल निकालने के लिए उसकी सर्जरी करनी पड़ी. इसके बाद मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया. शुक्रवार को एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से ये खबर आई है. रौतहट जिले के गुजरा नगरपालिका के नूरसाद मंसूरी के पेट में तेज दर्द की शिकायत के बाद चिकित्सकीय जांच के दौरान उनके पेट के भीतर वोदका की बोतल मिली.
द हिमालयन टाइम्स अखबार ने बताया कि उन्हें पांच दिन पहले एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था और बोतल को सफलतापूर्वक निकालने के लिए ढाई घंटे की सर्जरी की गई थी. एक डॉक्टर ने बताया, "बोतल से उसकी आंत फट गई थी, जिससे मल का रिसाव हो रहा था और उसकी आंतों में सूजन आ गई थी, लेकिन अब वह खतरे से बाहर है." पुलिस के मुताबिक, हो सकता है कि नूरसाद के दोस्तों ने उसे शराब पिलाई हो और मलाशय से होते हुए उसके पेट में जबरदस्ती बोतल घुसा दी हो. रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा संदेह है कि बोतल को मलाशय के माध्यम से नूरसाद के पेट में डाला गया था, जिसे नुकसान नहीं पहुंचा था.
रौतहट पुलिस ने घटना के सिलसिले में शेख समीम को गिरफ्तार किया है और नूरसाद के कुछ दोस्तों से भी पूछताछ की है. चंद्रपुर के क्षेत्रीय पुलिस कार्यालय के हवाले से कहा गया है, "जैसा कि हमें समीम पर शक है, हमने उसे हिरासत में रखा और जांच कर रहे हैं." रौतहट के पुलिस अधीक्षक बीर बहादुर बुढा मागर ने कहा, "नूरसद के कुछ अन्य दोस्त फरार हैं और हम उनकी तलाश कर रहे हैं." आगे की जांच चल रही है.

ईरान की पार्स गैस फील्ड पर हमले के बाद ईरान ने मिडिल ईस्ट में गैस फील्ड पर हमले की धमकी दी थी. जिसके बाद अब बहरीन के नेचुरल गैस रिफाइनरी पर ईरान ने हमला कर दिया है. बहरीन और सऊदी के बॉर्डर के पास बनी गैस फैसिलिटी पर ईरान ने मिसाइल दागी है. यह हमला इतना खतरनाक था का इसका असर बहरीन और सऊदी को जोड़ने वाले किंग फहाद पुल पर भी पड़ा है. पुल भी डैमेज हो गया है.

ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी की सैन्य हमले में मौत के बाद देश में शोक है. हमले में उनके बेटे, डिप्टी और कई सुरक्षाकर्मी भी मारे गए. राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने उन्हें करीबी साथी बताते हुए कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि खून का बदला लेंगे. लारिजानी को सुरक्षा और राजनीति के बीच अहम कड़ी माना जाता था. संसद अध्यक्ष और न्यायपालिका प्रमुख ने भी उन्हें निडर नेता बताया. लगातार हमलों से ईरान के नेतृत्व पर दबाव बढ़ा है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है.

आज तेहरान में सुप्रीम नेशनल सिक्युरिटी काउंसिल के प्रमुख अली लारीजानी के जनाजे में मानो पूरा ईरान उमड़ आया. युद्ध में अली खामेनेई के बाद लाराजानी का मारा जाना ईरान का सबसे बड़ा नुकसान है. ईरान लगातार नेतृत्वविहीन हो रहा है, और वाकई में घायल है. लेकिन लारीजानी की मौत के बावजूद अमेरिका के खिलाफ युद्ध में डटा हुआ है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक इंटरव्यू में साफ कहा कि लाराजानी की मौत से ईरान टूटा नहीं है, और अमेरिका को इसकी कीमत चुकानी होगी. इस बीच ईरान के खिलाफ और लेबनान में हिज्बुल्ला के खिलाफ भीषण प्रहार और बर्बादी के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप को नाटो देशों से निराशा हाथ लग रही है. युद्ध में किसी भी भूमिका में नाटो के उतरने से इनकार के बाद ट्रंप कह रहे हैं कि उन्हें नाटो की जरूरत नहीं.










