
'तलवार-ढाल' का 'जलती मशाल' से मुकाबला, इन चुनाव चिन्हों का शिवसेना से पुराना नाता
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चुनाव आयोग ने शिंदे गुट और ठाकरे गुट, दोनों को ही चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए हैं. बता दें कि ठाकरे गुट को 'ज्वलंत मशाल' (मशाल) और एकनाथ शिंदे गुट को 'दो तलवारें और एक ढाल' का चुनाव चिन्ह दिया गया है. यह दोनों ही निशान एक समय पर मूल पार्टी शिवसेना से जुड़े हुए थे. फिर लंबे टाइम बाद जाकर पार्टी को 'धनुष और तीर' का चुनाव चिन्ह मिला था.
महाराष्ट्र में शिवसेना के चुनाव चिन्ह की जंग को थामते हुए चुनाव आयोग ने ठाकरे गुट और शिंदे गुट दोनों को नए चुनाव चिन्ह और नाम आवंटित कर दिए हैं. बता दें कि उद्धव ठाकरे गुट को 'ज्वलंत मशाल' (मशाल) और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को 'दो तलवारें और एक ढाल' का चुनाव चिन्ह दिया गया है. यह दोनों ही निशान एक समय पर मूल पार्टी शिवसेना से जुड़े हुए थे. फिर लंबे टाइम बाद जाकर पार्टी को 'धनुष और तीर' का चुनाव चिन्ह मिला था.
बाल ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना ने 1985 में 'ज्वलंत मशाल' प्रतीक का उपयोग करके सफलतापूर्वक चुनाव लड़ा था, जिसे अब गुटीय झगड़े के बीच चुनाव आयोग द्वारा उद्धव ठाकरे गुट- 'शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे' को आवंटित किया गया है. शिंदे गुट को 'दो तलवारें और एक ढाल' का प्रतीक आवंटित किया गया है.
भुजबल ने मशाल के चिन्ह पर जीता था चुनाव
बता दें कि शिवसेना के पूर्व नेता छगन भुजबल ने पार्टी में रहते हुए मुंबई के मझगांव निर्वाचन क्षेत्र से 'ज्वलंत मशाल' चिन्ह पर चुनाव जीता था. उस वक्त संगठन के पास एक निश्चित चुनाव चिन्ह नहीं था. भुजबल ने बाद में विद्रोह किया और कांग्रेस में शामिल होने के लिए शिवसेना छोड़ दी. वह अब शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के एक प्रमुख नेता हैं.
तलवार और ढाल पर भी चुनाव लड़े कुछ उम्मीदवार
शिवसेना ने पहले भी नगर निकाय और विधानसभा चुनावों के दौरान 'ज्वलंत मशाल' चिन्ह का इस्तेमाल किया था. शिवसेना सांसद गजानन कीर्तिकर, जो पार्टी की स्थापना के बाद से पार्टी के साथ रहे हैं, उन्होंने बताया कि पार्टी के अधिकांश उम्मीदवारों को 1968 में 'तलवार और ढाल' का चुनाव चिह्न मिला था, जब उन्होंने मुंबई सहित पहला निकाय चुनाव लड़ा था. वहीं 1985 में, कई उम्मीदवारों को प्रतीक के रूप में 'ज्वलंत मशाल' मिला.

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