
ढाबे-रेस्तरां के हर कर्मचारी का होगा पुलिस वेरिफिकेशन, नाम डिस्प्ले करना होगा अनिवार्य...योगी सरकार का नया फरमान
AajTak
यूपी में अब खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट करने वालों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा. साथ ही ढाबों और रेस्टोरेंट में काम करने वाले कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन भी किया जाएगा. इसको लेकर सीएम योगी ने निर्देश जारी कर दिया है.
उत्तर प्रदेश में खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट पाए जाने पर रेस्टोरेंट व ढाबा संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इसको लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश जारी कर दिया है. खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट को लेकर मुख्यमंत्री ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक ली. इस दौरान उन्होंने कई दिशा-निर्देश दिए.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि जूस, दाल और रोटी जैसी खान-पान की वस्तुओं में मानव अपशिष्ट मिलाना वीभत्स है. यह सब स्वीकार नहीं किया जाएगा. अब ऐसे ढाबों/रेस्टोरेंट खान-पान के प्रतिष्ठानों की सघन जांच होगी. साथ ही प्रतिष्ठानों में काम करने वाले हर कर्मचारी का पुलिस वेरिफिकेशन भी होगा.
यह भी पढ़ें: यूपी में इन सरकारी कर्मचारियों को नहीं मिलेगा सितंबर का वेतन, पहले देना होगा ये ब्योरा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खान-पान की चीज़ों की शुद्धता-पवित्रता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम में आवश्यक संशोधन के निर्देश दिए हैं. जिसके अनुसार खान-पान के केंद्रों पर संचालक, प्रोपराइटर, मैनेजर आदि का नाम और पता डिस्प्ले करना अनिवार्य होगा. अब शेफ हों या वेटर सभी को मास्क और ग्लव्स लगाना होगा.
साथ ही होटल/ रेस्टोरेंट में सीसीटीवी लगाना भी अनिवार्य होगा. निर्देश के अनुसार अब अपशिष्ट आदि गंदी चीजों की मिलावट पाए जाने पर संचालक/प्रोपराइटर पर कठोर कार्रवाई की जाएगी. जानिए मुख्यमंत्री की तरफ से दिए गए प्रमुख दिशा-निर्देश....
● हाल के दिनों में देश के विभिन्न क्षेत्रों में जूस, दाल और रोटी जैसी खान-पान की वस्तुओं में मानव अपशिष्ट/अखाद्य/गंदी चीजों की मिलावट की घटनाएं देखने को मिली हैं. ऐसी घटनाएं वीभत्स हैं और आम आदमी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली हैं. ऐसे कुत्सित प्रयास कतई स्वीकार नहीं किया जा सकते. उत्तर प्रदेश में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस प्रबंध किए जाने आवश्यक हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियमों पर रोक लगा दी है. छात्रों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि यूजीसी का यह कानून छात्रों में भेदभाव उत्पन्न करता है. छात्रों का कहना है कि वे नियमों में बदलाव नहीं बल्कि पुराने नियमों को वापस चाहते हैं. यदि नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया तो वे भविष्य में भी प्रदर्शन जारी रखेंगे.

जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के बाद उनके पैतृक गांव में समाधि दी जाएगी. जुकाम के इलाज में लगाए गए इंजेक्शन के महज 30 सेकंड बाद तबीयत बिगड़ने से मौत का दावा किया जा रहा है. घटना से संत समाज में गहरी नाराजगी है. संतों ने निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सोशल मीडिया पर अनर्गल लिखने वालों पर कार्रवाई की मांग की है.

दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने सार्वजनिक शिकायतों के निपटारे में लापरवाही के आरोपों पर राजेंद्र नगर, कन्हैया नगर और अशोक विहार के जोनल रेवेन्यू अधिकारियों और कन्हैया नगर के एक असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर को सस्पेंड कर दिया. अचानक निरीक्षण में प्रशासनिक खामियां मिलने के बाद उन्होंने विभागीय कार्रवाई और प्रभावित जोनों में तत्काल नए अधिकारियों की तैनाती के आदेश दिए हैं.

देश के शिक्षण संस्थानों में दलित और आदिवासी छात्रों और शिक्षकों के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने के लिए विश्विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नए नियम लागू किए थे, जिसे लेकर विरोध इतना बढ़ गया कि मामला अदालत तक पहुंच गया. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है, जिसे लेकर राजनीतिक दलों के नजरिए अलग-अलग दिखे.

दक्षिण मुंबई के फोर्ट इलाके में पुलिसकर्मी बनकर एक केन्याई महिला से 66 लाख रुपये की ठगी करने के मामले में पुलिस ने ठाणे से 48 वर्षीय सुरेश रंगनाथ चव्हाण को गिरफ्तार किया है. उसका एक साथी अभी फरार है. 21 जनवरी को एम. जी. रोड पर आरोपी ने अपने साथी के साथ महिला की टैक्सी रोककर जांच के बहाने 66.45 लाख रुपये से भरे बैग जब्त किए और पुलिस स्टेशन चलने का कहकर फरार हो गया.








