
डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ से खुद घायल होगा अमेरिका... भारत के लिए आर्थिक विस्तार का मौका!
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दुनियाभर में आज एक शब्द सबसे ज़्यादा ट्रेंड कर रहा है — टैरिफ. एक अगस्त से अमेरिका की आखिरी समयसीमा खत्म हो गई है और 7 अगस्त से नई टैरिफ दरें लागू होंगी. अभी तक अमेरिका ने सिर्फ 33 देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं. बाकी 120 से ज़्यादा देश, जिनमें भारत भी शामिल है, अभी भी इससे बाहर हैं.
आज पूरी दुनिया में एक ही शब्द ट्रेंड कर रहा है और वह शब्द है टैरिफ. आज 1 अगस्त है और आज से टैरिफ को लेकर अमेरिका की अंतिम समयसीमा समाप्त हो गई है. व्हाइट हाउस ने अपने ताजा बयान में कहा है कि टैरिफ की नई दरें 7 अगस्त से प्रभावी होंगी और जिन देशों को अब तक इसकी जानकारी नहीं दी गई है, उन्हें आज देर रात 3 से 4 बजे तक सूचित कर दिया जाएगा. यह अमेरिका में शाम 4 से 5 बजे का समय होगा.
अब तक दुनिया में केवल 33 देश ऐसे हैं, जिनके साथ अमेरिका ने व्यापार समझौता अंतिम रूप से किया है. जबकि 120 से अधिक देशों ने अभी तक अमेरिका के साथ कोई डील नहीं की है. इनमें भारत भी शामिल है.
भारत की स्थिति और रुख भारत में इस मुद्दे पर काफी राजनीति हो रही है. लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह कृषि, खेती, मांसाहारी डेयरी उत्पाद, आनुवांशिक रूप से परिवर्तित फसलें और धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों पर कोई समझौता नहीं करेगी.
मांसाहारी डेयरी उत्पाद और जीएम फसलें मांसाहारी डेयरी उत्पाद का मतलब ऐसे मवेशियों के दूध से है, जिन्हें अमेरिका में मांस, मछली और मुर्गी के अवशेषों से बनी चारा दी जाती है. आनुवांशिक रूप से परिवर्तित फसलें वे होती हैं, जिनके बीजों को लैब में बदल दिया जाता है ताकि पैदावार अधिक हो और कीटों से नुकसान न हो.
भारत की अर्थव्यवस्था पर असर सीमित सरकार का कहना है कि नई टैरिफ दरों से भारत की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर नहीं होगा. खराब से खराब स्थिति में भी जीडीपी में केवल 0.2 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है.
शब्द 'टैरिफ' की उत्पत्ति टैरिफ शब्द अरबी भाषा के ‘ता-रिफ’ शब्द से आया है, जिसका अर्थ होता है ‘सूचित करना’. यूरोपीय व्यापारियों ने इसे टैक्स के रूप में अपनाया.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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