
ईरान के जनरल वाहिदी के 'वॉर प्लान' में फंसे ट्रंप-नेतन्याहू, कहा जाता है 'दुश्मनों का काल'
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ईरान और इज़रायल-अमेरिका के बीच जारी जंग में जनरल अहमद वाहिदी सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. IRGC की कमान संभालने के बाद उन्होंने ऐसी रणनीति तैयार की है, जो पारंपरिक युद्ध से अलग है. उनके 'वॉर प्लान' को लेकर दावा है कि इसने अमेरिका और इजरायल दोनों के लिए चुनौती खड़ी कर दी है.
मिडिल ईस्ट तनाव के बीच ईरान के ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी सुर्खियों में हैं. 28 फरवरी को इजरायली हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) प्रमुख की मौत के बाद उनको इस शक्तिशाली सैन्य संगठन की कमान सौंपी गई. अमेरिका और इजरायल के हमलों का जवाब देने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है.
यही वजह है कि जनरल अहमद वाहिदी अमेरिका और इजरायल की 'हिट लिस्ट' में सबसे ऊपर हैं. ईरान में उनको एक ऐसे रणनीतिकार के तौर पर देखा जाता है, जिसे हराना आसान नहीं है. कहा जाता है कि मोसाद और सीआईए जैसी एजेंसियां भी अब तक उन्हें रोक नहीं सकी हैं. आज वो IRGC के कमांडर इन चीफ हैं, जो ईरान के सबसे ताकतवर पदों में से एक माना जाता है.
जनरल वाहिदी कुद्स फोर्स के पहले कमांडर रह चुके हैं, जो सैन्य और खुफिया ऑपरेशन संभालती है. वो साल 2009 से 2013 तक ईरान के रक्षा मंत्री रह चुके हैं. साल 2021 से 2024 तक उन्होंने गृहमंत्री के तौर पर भी काम किया. करीब 3 दशक तक अयातुल्ला अली खामेनेई की कोर टीम का हिस्सा रहे हैं. 31 दिसंबर 2025 को उन्हें IRGC का डिप्टी कमांडर इन चीफ नियुक्त किया था.
ईरान की सैन्य रणनीति, खासकर विदेशी ऑपरेशन और डिफेंस सिस्टम के विकास में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है. मौजूदा युद्ध में जनरल वाहिदी की रणनीति पारंपरिक युद्ध से अलग बताई जा रही है. उनका पूरा प्लान 'असिमेट्रिकल वारफेयर' यानी गुरिल्ला युद्ध पर आधारित है. इस रणनीति में कम संसाधनों के बावजूद बड़े और ताकतवर दुश्मन को कई मोर्चों पर उलझाया जाता है.
इसमें गुरिल्ला हमले, आर्थिक दबाव, लंबा युद्ध और मनोवैज्ञानिक असर जैसे तत्व शामिल होते हैं. ईरान ने कई फ्रंट पर जवाबी हमले किए हैं. अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, दुश्मन के रडार और हथियार सिस्टम को नुकसान पहुंचाया गया. इसके साथ ही, होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए रखते हुए तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को भी निशाना बनाया जा रहा है.

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को कहा कि वैश्विक आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को कम करने में मदद करने के लिए अमेरिका जल्द ही टैंकरों में फंसे ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटा सकता है. बेसेंट ने कहा कि प्रतिबंधित ईरानी तेल के वैश्विक आपूर्ति में शामिल होने से अगले 10 से 14 दिनों तक तेल की कीमतें कम रखने में मदद मिलेगी.

ईरान से अमेरिका-इजरायल की लड़ाई की आंच आज और भड़क गई. अपने सबसे बड़े गैस फील्ड साउथ पार्स पर इजरायल के हमले के जवाब में ईरान ने बीती रात से खाड़ी देशों में कई अहम तेल और गैस के ठिकानों पर हमला किया है. इन हमलों का असर ये है कि आज भारत के समय से दोपहर 3 बजे तक ब्रेंट क्रूड ऑयल 118 डॉलर प्रति बैरल की सीमा को पार कर गया था. इसका असर शेयर बाजार से लेकर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ा है. जहां शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट आयी वहीं सोने-चांदी की कीमतें भी टूट गईं. भारत के शेयर बाजार से आज 12 लाख करोड़ से अधिक की संपत्ति साफ हो गई है. सवाल ये है कि क्या पश्चिम एशिया में अब युद्ध का रुख पूरी दुनिया को चपेट में ले चुका है ? इस बीच पहली बार 12 मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों ने खाड़ी देशों पर ईरान के हमले के खिलाफ बयान जारी किया है. तो उधर राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर कड़ा रुख बरकरार रखने के बावजूद ईरानी गैस फील्ड पर इजरायल के हमले से पल्ला झाड़ा है.

अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि आज ईरान पर अमेरिका अटैक का सबसे बड़ा पैकेज लॉन्च करने जा रहा है. जंग की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे उद्देश्य कभी बदले नहीं हैं और ये जंग राष्ट्रपति ट्रंप की इच्छानुसार खत्म होगा. आज ही ईरान ने अपने स्टैंड को बताते हुए कहा था कि अभी उसका बदला पूरा नहीं हुआ है.

ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग अब अपने सबसे निर्णायक और संभवतः सबसे खौफनाक मोड़ पर पहुंच गई है. आज डोवर एयरफोर्स बेस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन छह अमेरिकी नायकों को अंतिम विदाई दी, जिन्होंने एक विमान हादसे में अपनी जान गंवाई लेकिन इस शोक के बीच, वॉशिंगटन के गलियारों से एक ऐसी खबर आ रही है जो पूरी दुनिया को दहला सकती है. रॉयटर्स की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन अब ईरान में 'बूट्स ऑन द ग्राउंड' यानी थल सेना उतारने पर बेहद गंभीरता से विचार कर रहा है.

मैं श्वेता सिंह सीधे युद्ध भूमि से आपको महायुद्ध के बीसवें दिन की खबर बता रही हूं. कल ईरान की गैस फील्ड पर इजरायल के हमले के बाद लगातार चार खाड़ी देश के ऑयल-गैस डिपो-रिफाइनरी पर बड़ा हमला ईरान ने कर दिया है. ईरान ने सऊदी अरामको और यूएई के टर्मिनल के अलावा कतर के सबसे बड़े गैस टू लिक्वड प्लांट रास लफान पर मिसाइल हमला कर दिया. कतर के इस प्लांट से दुनिया को 20 से 25 प्रतिशत गैस की सप्लाई होती है. वहीं सऊदी अरब के यनबू पोर्ट पर स्थित सैमरेफ ऑयल रिफाइनरी पर हवाई हमला हुआ है.

अमेरिकी अधिकारियों के वॉशिंगटन आर्मी बेस के ऊपर कुछ अनजान ड्रोन देखे जाने बाद वहां हड़कंप मच गया है. इसी बेस पर विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ रहते हैं. अभी तक ये पता नहीं लग पाया है कि ये ड्रोन कहां से आए थे. इसके बाद सुरक्षा और बढ़ा दी गई है. इस पर व्हाइट हाउस में एक बैठक भी हुई है, जिसमें इस बात पर चर्चा हुई है कि इन हालातों से कैसे निपटा जाए.







