
डायबिटीज में भूलकर भी ना खाएं ये 6 चीजें, वरना और खतरनाक हो जाएगी बीमारी
AajTak
डायबिटीज की बीमारी में खानपान का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है. इसमें छोटी सी लापरवाही भी आपके शुगर लेवल को बढ़ा सकती है. इसलिए मरीजों को हमेशा शुगर लेवल को नियंत्रित रखने वाली चीजों का ही सेवन करना चाहिए.
डायबिटीज की बीमारी में दवा से ज्यादा डाइट का ध्यान रखने की जरूरत होती है. डायबिटीज में आपका शरीर इंसुलिन हार्मोन का ठीक से निर्माण या उपयोग नहीं कर पाता है. इससे रक्त में बहुत अधिक ग्लूकोज का निर्माण होता है जिससे आप डायबिटीज का शिकार हो जाते हैं.
भारत समेत दुनियाभर में डायबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. डायबिटीज के मरीजों को अपनी डाइट और खानपान का खास ख्याल रखने की सलाह दी जाती है क्योंकि छोटी लापरवाही भी शुगर लेवल को बढ़ा सकती है. यहां हम आपको बताएंगे कि ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने के लिए किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए.
डायबिटीज दो प्रकार की होती है:
टाइप 1 डायबिटीज - यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपका शरीर इंसुलिन का बिल्कुल उत्पादन नहीं कर पाता है और इसे जुवेनाइल डायबिटीज के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यह आम तौर पर बच्चों और किशोरों में होता है लेकिन वयस्कों में भी हो सकता है. इसमें आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली ही इंसुलिन उत्पादन कोशिकाओं पर हमला करने लगती हैं और उन्हें नष्ट कर देती हैं. यही कारण है कि टाइप 1 मधुमेह को एक ऑटोइम्यून स्थिति के रूप में जाना जाता है.
टाइप 2 डायबिटीज - इस प्रकार की डायबिटीज तब होती है जब शरीर आवश्यक इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है या इंसुलिन का उपयोग नहीं कर पाता, जैसा उसे करना चाहिए. टाइप 2 एक ऑटो-इम्यून कंडीशन नहीं है. इसमें आपका शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता है या जो बनाता है उसका ठीक से उपयोग नहीं कर पाता है. ऐसा कई कारणों से हो सकता है.
दुनिया भर में डायबिटीज के कुल मामलों में 8 प्रतिशत टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित हैं और 90 प्रतिशत टाइप 2 से पीड़ित हैं.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X, जिसे पहले ट्विटर के नाम से जाना जाता था, एक हफ्ते में दूसरी बार बड़े आउटेज का शिकार हुआ. शुक्रवार को भारत, अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देशों में करोड़ों यूजर्स को प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने में दिक्कत हुई. कई लोगों को लॉगिन पर खाली स्क्रीन दिखी. आउटेज की वजह अब तक साफ नहीं है.

कारों में दिए जाने वाले बड़े-बड़े टचस्क्रीन खतरनाक साबित हो सकते हैं. ऐसी कई रिसर्च में ये बात सामने आ चुकी है कि, सामान्य डैशबोर्ड की तुलना में ऐसी फीचर पैक्ड टचस्क्रीन वाले डैशबोर्ड ड्राइवर को ज्यादा डिस्ट्रैक्ट करते हैं. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि, कहीं हम कारों को स्मार्ट बनाने के चक्कर में खतरा तो मोल नहीं ले रहे हैं.











