
ट्रेड यूनियनों की हड़ताल के समर्थन में आए महिला, किसान, पत्रकार संगठन; लेबर कोड वापस लेने की मांग
The Wire
दिल्ली के जंतर-मंतर पर गुरुवार को मोदी सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए चार लेबर कोड के ख़िलाफ़ ज़ोरदार प्रदर्शन देखने को मिला. इस प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में ट्रेड यूनियन के सदस्य, मज़दूर, युवा, पत्रकार और नागरिक समाज के लोग शामिल हुए. इस दौरान मज़दूर संगठनों ने आरोप लगाया कि नए लेबर कोड से कामगारों का शोषण बढ़ेगा और पूंजीपतियों को फायदा मिलेगा.
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर की सड़कें गुरुवार (12 फरवरी) को ‘मजदूर एकता जिंदाबाद’ और ‘मोदी सरकार लेबर कोड वापस लो’ के नारे से गूंज रही थीं. ये नारे केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, स्वतंत्र सेक्टोरल फेडरेशनों और एसोसिएशनों के संयुक्त मंचों द्वारा पूरे देश में आम हड़ताल यानी ‘भारत बंद’ के आह्वान की एकजुटता में लगाए जा रहे थे, जिसमें सैकड़ों मजदूरों, युवाओं, पत्रकारों और नागरिक समाज के लोग शामिल हुए.
मालूम हो कि मोदी सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए चार लेबर कोड का सांकेतिक विरोध देशभर में ट्रेड यूनियनें कर रही हैं. मजदूर संगठनों का मानना है कि इन नए लेबर कोड से कामगारों का शोषण बढ़ेगा और पूंजीपतियों को फायदा मिलेगा.
भारत बंद का मुख्य मुद्दा नए लेबर कोड की वापसी, मनरेगा की बहाली और न्यूनतम वेतन, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी जैसे अधिकारों की मांग है. मजदूर संगठन सरकार के नए लेबर कोड को श्रमिकों के मौलिक अधिकारों का हनन बता रहे हैं, जिसमें काम के निर्धारित घंटे, श्रम संगठन बनाना, श्रमिकों के हितों के लिए सामूहिक तौर पर आवाज उठाने की क्षमता आदि को खत्म करने की कोशिश की गई है.
इस प्रदर्शन में दस केंद्रीय ट्रेड यूनियन्स, जिसमें इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक), हिंद मजूदर सभा (एचएमएस), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू), अखिल भारतीय केंद्रीय ट्रेड यूनियन परिषद (एआईसीसीटीयू), ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर (टीयूसीसी), ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी) लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (एलपीएफ़) और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन (यूटीयूसी) जैसे मजदूर संगठनों के साथ ही महिला संगठन एडवा, छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और पत्रकार संगठन दिल्ली पत्रकार संघ और केरल वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के सदस्यों ने भी भाग लिया.
लेबर कोड में क्या है, जिसके खिलाफ हैं संगठन?
केंद्र सरकार नए लेबर कोड को आज़ादी के बाद मजदूरों लिए सबसे बड़े और प्रगतिशील सुधारों में से एक बता रही है. सरकार का कहना है कि इन नए लेबर कोड का उद्देश्य ‘व्यापार में सुगमता बढ़ाना, रोज़गार सृजन को बढ़ावा देना, प्रत्येक श्रमिक के लिए सुरक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक और वेतन सुरक्षा सुनिश्चित करना’ है.

लोकसभा में सपा सांसद धर्मेंद्र यादव के सवाल के जवाब में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि मणिकर्णिका घाट एएसआई के तहत संरक्षित स्मारक नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि घाट पर चल रहा कार्य घाट की गरिमा को बहाल करने के उद्देश्य से किए जा रहे जीर्णोद्धार और संरक्षण परियोजना का हिस्सा है.

देश में एलपीजी गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के बीच गुरुवार को संसद में जारी बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान ज़ोरदार हंगामा देखने को मिला. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सरकार पर इस मुद्दे पर ग़लत जानकारी देने का आरोप लगाया और इस पर संसद के भीतर विस्तृत चर्चा की मांग की. हालांकि, सरकार का कहना है कि देश के पास पर्याप्त भंडार हैं.

ईरान संघर्ष के बीच कंटेनर जहाजों की कमी के कारण कच्चे माल की कीमतों में करीब 30% की बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते भारत में दवाओं के दाम तेज़ी से बढ़ने की आशंका है. उद्योग से जुड़े लोगों ने कहा कि जहाजों की कमी के कारण चीन से आने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) की आपूर्ति प्रभावित हुई है. चीन भारतीय दवा निर्माताओं के लिए कच्चे माल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक ने ‘प्रेस नोट 3’ के जरिए भारत के साथ स्थल सीमा साझा करने वाले देशों, मुख्य रूप से चीन पर लगाए गए प्रतिबंधों को वापस लेने का फैसला किया है. यह नियम इन देशों से आने वाले स्वत: निवेश पर रोक लगाता था. विपक्षी दलों ने इस निर्णय को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है.

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते मार्च 2026 की शुरुआत से विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ), जो किसी एयरलाइन की परिचालन लागत का लगभग 40% हिस्सा होता है, की आपूर्ति में रुकावटों के कारण क़ीमतों में काफी वृद्धि हुई है, जिसके चलते एयर इंडिया समूह ने अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर चरणबद्ध तरीके से फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का निर्णय लिया है.

ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बीच भारत के कई राज्यों में एलपीजी सिलेंडरों को लेकर चिंता बढ़ गई है. कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं. हालांकि सरकार ने देश में गैस की कमी से इनकार किया है. अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा स्थिति घबराहट में बढ़ी बुकिंग और वितरण बाधाओं से बनी है.

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने विधानसभा में बताया कि जून 2024 से अब तक राज्य में 54 सांप्रदायिक दंगे और सात मॉब लिंचिंग की घटनाएं दर्ज की गई हैं. सबसे अधिक 24 सांप्रदायिक दंगे बालासोर ज़िले में दर्ज किए गए, जबकि 16 मामले खुर्दा ज़िले में सामने आए. हालांकि इन मामलों में 50 प्रतिशत से भी कम मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया गया है.

दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में होली पर मुस्लिम महिला पर गुब्बारा फेंकने को लेकर हुए विवाद में 26 वर्षीय तरुण की हत्या के बाद रविवार को एमसीडी ने मुख्य आरोपियों के घर के कुछ हिस्से को अतिक्रमण बताते हुए ढहा दिया. वहीं आरोपी परिवार का कहना है कि हत्या उन्होंने नहीं की है. तरुण का परिवार न्याय की मांग कर रहा है, वहीं आरोपी परिवार की एक सदस्य का कहना है कि पड़ोसियों की लड़ाई को धर्म की लड़ाई बना दिया गया है.





