
ट्रंप का विस्तारवादी प्लान... विशलिस्ट में कनाडा, पनामा से लेकर ग्रीनलैंड तक क्यों?
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डोनाल्ड ट्रंप की विस्तारवादी विशलिस्ट में नया नाम ग्रीनलैंड का है. लेकिन कनाडा-कनाडा जपते-जपते वह पनामा और ग्रीनलैंड तक कैसे पहुंच गए? वैसे तो ग्रीनलैंड पर अमेरिकी प्रभुत्व की ट्रंप की इच्छा कोई नई नहीं है. वह राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में भी ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात करते रहे हैं.
कैपिटलिस्ट डोनाल्ड ट्रंप चीन की तरह ही विस्तारवादी नीतियों पर अमल करने का मन बना चुके हैं. कनाडा को अमेरिका में शामिल कर उसे 51वां स्टेट बनाने के सपने देख रहे ट्रंप अब पनामा और ग्रीनलैंड तक को अमेरिकी जद में लाने की बातें कर रहे हैं. ट्रंप की बयानबाजियों ने लगभग-लगभग स्पष्ट कर दिया है कि उन्होंने अमेरिका के विस्तार का एजेंडा तैयार कर लिया है और इसी एजेंडे को वह अमलीजामा पहनाएंगे.
ट्रंप की इसी विस्तारवादी विशलिस्ट में नया नाम ग्रीनलैंड का है. लेकिन कनाडा-कनाडा जपते-जपते वह पनामा और ग्रीनलैंड तक कैसे पहुंच गए? वैसे तो ग्रीनलैंड पर अमेरिकी प्रभुत्व की ट्रंप की इच्छा कोई नई नहीं है. वह राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में भी ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात करते रहे हैं. 2019 में उन्होंने बकायदा ग्रीनलैंड को खरीदने की मंशा भी जाहिर की थी तो ग्रीनलैंड की सरकार भड़क गई थी, जिसके बाद उन्होंने ग्रीनलैंड का पहले से निर्धारित अपना दौरा रद्द कर दिया था.
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के इरादे क्या हैं?
अब सवाल है कि ग्रीनलैंड ही क्यों? ग्रीनलैंड की स्ट्रैटैजिक लोकेशन दरअसल उत्तरी अटलांटिक महासागर है. वैसे तो यह उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप का हिस्सा ही है लेकिन जियो पॉलिटकली देखें तो यूरोप से भी इसका कनेक्शन है. ट्रंप राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर ग्रीनलैंड पर कब्जे की बातें कर रहे हैं. लेकिन असल वजह ये भी है कि जमीन के इस टुकड़े पर मौजूद प्राकृतिक संसाधनों और उसकी भू-राजनीतिक स्थिति की वजह से ट्रंप की नजर इस पर है.
अब जरा ग्रीनलैंड की मौजूदा स्थिति को समझ लेते हैं. 1953 तक ग्रीनलैंड डेनमार्क का उपनिवेश था. मौजूदा समय में भी इस पर डेनमार्क का नियंत्रण ही है लेकिन 2009 से वहां पर सेमी-ऑटोनोमस सरकार है. घरेलू नीतियों से लेकर अन्य मामलों में ग्रीनलैंड की सरकार ही सर्वेसर्वा है लेकिन रक्षा और विदेश संबंधी मामले लेने का हक डेनमार्क की सरकार के पास है.
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