
टैरिफ से ट्रंप ने फिर भड़का दी ग्लोबल ट्रेड वॉर की आग, जानें- क्या होगा नुकसान
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अमेरिका में अब करीब एक सदी में सबसे ज्यादा संरक्षणवादी व्यापार व्यवस्था लागू है, जहां औसत टैरिफ पिछले साल की तुलना में छह गुना ज़्यादा है. कुछ साझेदारों को मामूली राहत मिलती है, लेकिन कुछ को अमेरिका में सामान बेचने के लिए ज़्यादा लागत का सामना करना पड़ता है.
ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (EU) के साथ समझौतों को फाइनल करते हुए, डोनाल्ड ट्रंप ने 69 देशों सहित दर्जनों अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर टैरिफ लगाए. ये टैरिफ अलग-अलग थे. सीरिया पर सबसे ज़्यादा 41% और कनाडा पर 7 अगस्त से 35% टैरिफ लगाया गया.
अमेरिका में अब करीब एक सदी में सबसे ज्यादा संरक्षणवादी व्यापार व्यवस्था लागू है, जहां औसत टैरिफ पिछले साल की तुलना में छह गुना ज़्यादा है. कुछ साझेदारों को मामूली राहत मिलती है, लेकिन कुछ को अमेरिका में सामान बेचने के लिए ज़्यादा लागत का सामना करना पड़ता है. इससे ग्लोबल सप्लाई चेन्स बाधित होंगी और व्यापार को लेकर तनाव बढ़ेगा.
क्या कहते हैं आंकड़े?
गहराई से समझते हैं...
अमेरिका ने अपने कुछ सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों पर टैरिफ दरों में बदलाव किया है. जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और वियतनाम सहित कई एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर शुल्क कम होंगे. भारत की दर थोड़ी कम करके 25% कर दी गई है. ब्रिटेन और ब्राज़ील 10% पर बने रहेंगे. स्विट्ज़रलैंड में टैरिफ में भारी बढ़ोतरी होगी और यह 39% हो जाएगा, जो प्रमुख साझेदारों में सबसे ज़्यादा है.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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