
टैरिफ के मामले में क्या भारत भी ट्रंप को चीन-ब्राजील जैसा जवाब दे सकता है?
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ब्राजील के राष्ट्रपति लूला ट्रंप को ललकार के 2026 के चुनावों के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं. ध्यान रहे कि लूला कम्यूनिस्ट हैं. भारत में अगर कम्यूनिस्ट सरकार होती तो हो सकता है कुछ ऐसा ही यहां भी हो रहा होता. इकॉनमी भले चौपट हो जाती पर ट्रंप को भारत से भी ललकार मिलती.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर लगातार भारत है. कभी टैरिफ के बहाने तो कभी एपल और अन्य अमेरिकी कंपनियों पर भारत में प्रोडक्शन न करने की चेतावनी देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति भारत को अपने अर्दब में लेने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं.भारत के बार-बार इनकार करने के बाद भी ट्रंप करीब 30 बार बोल चुके हैं कि भारत-पाकिस्तान की जंग उन्होंने व्यापार के नाम पर रुकवा दी. उनके व्यक्तित्व के हल्कापन का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है.
भारत में एक कहावत है कि ऐसे लोगों के साथ जैसे को तैसा वाला व्यवहार ही सही रहता है. वैसे भी ट्रंप ऐसे ही लोगों से सही रहते हैं. चीन ने ट्रंप को उन्हीं की भाषा में जवाब दिया और वो नरम पड़ गए. अब ब्राजील भी उन्हें उसी भाषा में जवाब दे रहा है. जिसकी उम्मीद ट्रंप को बिल्कुल भी नहीं रही होगी. ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इंसियो लूला डी सिल्वा ने डोनाल्ड ट्रम्प की नाक में बढ़िया दम किया है. 50% टैरिफ की धमकियों के बाद डी सिल्वा ने कहा कि हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं, लेकिन गंभीरता का मतलब ग़ुलामी नहीं होता है.
शायद उन्हें पता नहीं कि ये ब्राज़ील है और यहां न्यायपालिका स्वतंत्र है. मतभेद हो तो टैरिफ नहीं लगाया जाता, अल्टीमेटम नहीं दिया जाता. डी सिल्वा ने अमेरिका को धमकी भी दे दी कि कॉफी, बीफ और नारंगी का जूस ब्राजील से जाता है, अब अमेरिकी इसका अधिक दाम चुकाने के लिए तैयार रहें. अब सवाल यह उठता है कि क्या भारत भी ट्रम्प को लूला जैसा जवाब दे सकती है.
1-भारत न चीन है और न ही ब्राजील
चीन आज दुनिया की दूसरी महाशक्ति है. जिस तरह चीन तरक्की कर रहा है वह जल्दी ही अमेरिका को भी पीछे छोड़ सकता है. चीन आज अपने शर्तों पर व्यापार कर सकता है. वह दुनिया की फैक्ट्री बोला जाता है. बिना चीन के आज दुनिया भर में काम ठप हो सकता है . इसलिए हम चीन की तुलना नहीं कर सकते हैं. रही बात ब्राजील की तो उससे अपनी तुलना हो सकती है. पर लूला जिस तरह से ललकार रे हैं ट्रंप को उस तरह से भारत कभी नही ंकर सकता है. क्योंकि हमारी प्रकृति ही ऐसी नहीं है.
लूला ने कहा कि ब्राजील एक संप्रभु राष्ट्र है और वह किसी "ग्रिंगो" (विदेशी, विशेष रूप से अमेरिकी) के आदेश को नहीं मानेगा. लूला ने ब्राजील की आर्थिक पारस्परिकता कानून (Economic Reciprocity Law) के तहत अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगाने की धमकी दी. लूला ने इस विवाद को राष्ट्रीय गौरव से जोड़ा, जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़ी. ट्रम्प की धमकी को उन्होंने बोल्सोनारो ( पूर्व राष्ट्रपित) के समर्थन के रूप में चित्रित किया, जिसे उन्होंने "देशद्रोही" करार दिया है. मतलब साफ है कि लूला अमेरिका विरोध को 2026 के चुनावों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. ध्यान रहे कि लूला कम्यूनिस्ट हैं. भारत में अगर कम्यूनिस्ट सरकार होती तो हो सकता है कुछ ऐसा ही यहां भी हो रहा होता. इकॉनमी भले चौपट हो जाती पर ट्रंप को भारत से भी ललकार मिलती.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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