
झारखंडः तपोभूमि के नाम से भी जाना जाता है बैधनाथ धाम, यहीं गिरा था माता सती का हृदय, जानें पूरी कहानी
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यह देश का पहला ऐसा स्थान है जो ज्योतिर्लिंग के साथ ही शक्तिपीठ भी है. ज्योतिर्लिंग की कथा कई पुराणों में है, लेकिन शिवपुराण में इसकी विस्तारपूर्वक जानकारी मिलती है.
देवघरः दो साल से कोरोना की वजह से देवघर में श्रावणी मेले का आयोजन नहीं हो रहा है, जिसकी वजह मंदिर में सिर्फ सरकारी पूजा हो रही है. मेले का आयोजन नहीं होने से ही यहां सन्नाटा पसरा है. जब मेले का आयोजन होता है तो लाखों शिव भक्त सुल्तानगंज से जल लेकर यहां पहुंचते हैं. देवघर के बैधनाथ धाम और माता सती से जुड़ी खास जानकारी पर पढ़ें विशेष रिपोर्ट. देवघर में स्थित बाबा बैधनाथ धाम को तपोभूमि के नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है कि माता पार्वती का हृदय इसी भूमि पर गिरा था, इस वजह से देवघर को ह्रदय स्थली के नाम से भी जाना जाता है. पन्ना लाल मित्रा (महाराज जी) पंडा ने बताया कि प्रजापति राजा दक्ष की पुत्री माता सती के पति भगवान शिव को यज्ञ में आमंत्रित नहीं किए जाने से वह काफी दुखी थीं. माता सती पिता द्वारा शिव के अपमान को सह नहीं पाईं और अपने शरीर को यज्ञ कुंड के हवाले कर दिया. जब इसकी खबर भगवान शिव को लगी तो वे क्रोधित होकर राजा दक्ष के यहां पहुंचे और त्रिशूल से राजा दक्ष के सिर को अग्नि के हवाले कर दिया.More Related News

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