
‘जेल का वो गुलाब, ज़िंदगी के फ़लसफ़े सिखाते हुए मानो मेरा उस्ताद बन गया है…’
The Wire
दिल्ली दंगों से संबंधित मामले में गिरफ़्तार किए गए 'यूनाइटेड अगेंस्ट हेट' के ख़ालिद सैफ़ी का जेल से अपने परिवार को भेजा गया ख़त.
ख़ालिद सैफ़ी उस आंदोलन में सक्रिय थे जो 2019 में नागरिकता के भेदभावपूर्ण कानून के खिलाफ भारत भर में शुरू हुआ था. मुसलमानों, अन्य अल्पसंख्यकों और दलितों के खिलाफ हिंसा के विरुद्ध उन्होंने ‘यूनाइटेड अगेंस्ट हेट’ नामक संस्था का निर्माण कई मित्रों के साथ मिलकर किया. यह संगठन हिंसा और नफरत की सारी घटनाओं का रिकॉर्ड रखने के अलावा हिंसा के शिकार लोगों को हर तरह की मदद करने का काम कर रहा था. इसके अलावा यह नफरत की जगह मोहब्बत का संगठित अभियान भी था. इस संगठन पर भारत के गृह मंत्री ने 2020 में दिल्ली के उत्तर पूर्वी भाग में हुई हिंसा का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया. खालिद सैफी ने समानतापूर्ण नागरिकता के इस आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने में और अधिक से अधिक लोगों को इसमें जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई. इसी कारण पिछले साल 26 फरवरी को उन्हें गिरफ्तार करके उनपर यूएपीए जैसे तथाकथित आतंकवाद विरोधी क़ानून की धाराएं लगा दी गईं.
कैम्पेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन (सीएएसआर) ने आरोप लगाया है कि दिल्ली में दो मज़दूर अधिकार कार्यकर्ताओं, दो विस्थापन-विरोधी कार्यकर्ताओं और छह छात्रों को 'अधिकारियों' ने उठा लिया है और उनका अब तक कोई पता नहीं है. संगठन ने उनके ठिकाने की जानकारी, सुरक्षा की गारंटी और कानूनी सहायता सुनिश्चित करने की मांग की है.

महाराष्ट्र में एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने से पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना प्रभावित होने की आशंका जताई गई है. प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने बीपीसीएल और एचपीसीएल से स्वयं सहायता समूहों और केंद्रीय रसोईघरों के लिए सिलेंडरों की प्राथमिक आपूर्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है, ताकि छात्रों के भोजन पर असर न पड़े.

लोकसभा में सपा सांसद धर्मेंद्र यादव के सवाल के जवाब में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि मणिकर्णिका घाट एएसआई के तहत संरक्षित स्मारक नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि घाट पर चल रहा कार्य घाट की गरिमा को बहाल करने के उद्देश्य से किए जा रहे जीर्णोद्धार और संरक्षण परियोजना का हिस्सा है.

देश में एलपीजी गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के बीच गुरुवार को संसद में जारी बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान ज़ोरदार हंगामा देखने को मिला. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सरकार पर इस मुद्दे पर ग़लत जानकारी देने का आरोप लगाया और इस पर संसद के भीतर विस्तृत चर्चा की मांग की. हालांकि, सरकार का कहना है कि देश के पास पर्याप्त भंडार हैं.

ईरान संघर्ष के बीच कंटेनर जहाजों की कमी के कारण कच्चे माल की कीमतों में करीब 30% की बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते भारत में दवाओं के दाम तेज़ी से बढ़ने की आशंका है. उद्योग से जुड़े लोगों ने कहा कि जहाजों की कमी के कारण चीन से आने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) की आपूर्ति प्रभावित हुई है. चीन भारतीय दवा निर्माताओं के लिए कच्चे माल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है.








