
जानें कितनी तेजी से बढ़ रही है देश की आबादी? कितना बड़ा है जनसंख्या का 'धर्म' संकट
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भारत में एक बार फिर से जनसंख्या नियंत्रण को लेकर बहस शुरू हो गई है. बीजेपी अक्सर जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की बात करती रही है. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि भारत में 5 दशक में किस धर्म की आबादी कितनी तेजी से बढ़ी है? और क्या भारत इस बढ़ती आबादी का बोझ सह पाएगा?
बढ़ती आबादी पर चिंता करना और उस पर राजनीति करना, दो अलग बातें हैं. लेकिन, भारत जैसे देश में बढ़ती आबादी पर चिंता भी बिना राजनीतिक मुद्दा बने नहीं रहती. विश्व जनसंख्या दिवस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी एक वर्ग की आबादी बढ़ने से अराजकता फैलने लगती है. वहीं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून की जरूरत है, ताकि 8-8, 10-10 बच्चे पैदा करने वाली विकृत मानसिकता पर रोक लगे.
भारत में जनसंख्या नियंत्रण पर कानून की मांग होती रही है. 2019 में 15 अगस्त के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जनसंख्या नियंत्रण की बात कही थी. जनसंख्या नियंत्रण पर ये बहस ऐसे समय शुरू हुई है, जब संयुक्त राष्ट्र ने अनुमान लगाया है कि अगले साल तक भारत सबसे ज्यादा आबादी के मामले में चीन को पीछे छोड़ देगा.
अमेरिकी सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 18वीं सदी में आबादी 12 करोड़ के आसपास रही होगी. 1820 में भारत की आबादी 13.40 करोड़ के आसपास थी. 19वीं सदी तक भारत की आबादी ने 23 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया.
2001 में भारत की आबादी 100 करोड़ के पार चली गई. अभी भारत की आबादी 140 करोड़ के आसपास है. 2050 तक भारत की आबादी 166 करोड़ के आसपास होगी.
किस धर्म की आबादी कितनी तेजी से बढ़ रही?
- 2011 की जनगणना के मुताबिक, भारत की आबादी 121 करोड़ से ज्यादा है. इसमें 96.63 करोड़ हिंदू और 17.22 करोड़ मुस्लिम हैं. भारत की कुल आबादी में 79.8% हिंदू और 14.2% मुस्लिम हैं. इनके बाद ईसाई 2.78 करोड़ (2.3%) और सिख 2.08 करोड़ (1.7%) हैं. बाकी बौद्ध और जैन धर्म को मानने वालों की आबादी 1% से भी कम है.

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