
जब भंसाली ने इच्छामृत्यु पर बनाई फिल्म, रो पड़े थे ऋतिक, सलमान ने उड़ाया था मजाक
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इच्छामृत्यु के दर्द को संजय लीला भंसाली ने अपनी फिल्म गुजारिश में प्रभावशाली ढंग से दिखाया था. फिल्म में ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या राय ने मुख्य भूमिका निभाई थी. फिल्म ने कई विवादों का सामना किया, जिसमें कहानी चोरी के आरोप, तंबाकू प्रचार का विवाद और लीगल नोटिस शामिल थे.
31 वर्षीय हरीश राणा को सुप्रीमकोर्ट ने इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी है. इच्छामृत्यु का दर्द क्या होता है, इसे बखूबी डायरेक्टर संजय लीला भंसाली ने बड़े पर्दे पर दिखाया था. 16 साल पहले ऐश्वर्या राय, ऋतिक रोशन जैसे बड़े सितारों से सजी फिल्म गुजारिश थी. लेकिन देवदास, हीरामंडी जैसी भव्य फिल्म बनाने वाले भंसाली को आखिर इच्छामृत्यु जैसे संवेदनशील विषय पर फिल्म बनाने की क्यों सूझी थी? इस बनाने के बाद इंडस्ट्री ने क्या रिएक्शन दिया था? ये सारी यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं, क्यों जब ऐसे मुद्दों पर बात होती है तो जरूरी होता है कि पूरा न्याय किया जाए.
बात करते हैं गुजारिश की, इस फिल्म की कहानी ईथन नाम के एक व्यक्ति पर आधारित थी, जो जिंदगीभर के लिए अपाहिज हो जाने के बाद इच्छा मृत्यु पाने का फैसला करता है. लेकिन ईथन को अपनी दर्दभरी जिंदगी में प्यार भी मिलता है और वो प्यार होती है उसकी देखभाल करना वाली सोफिया. ईथन के किरदार में जहां ऋतिक रोशन ने कमाल कर दिखाया था तो वहीं ऐश्वर्या राय भी सोफिया के किरदार संग दर्शकों के मन में बस गयी थी. लेकिन इस फिल्म के हिस्से में कई बड़े विवाद ही आए थे.
भंसाली ने क्यों बनाई ये फिल्म
डायरेक्टर का कहना था कि जब ये फिल्म मैंने बनाई थी, उसके पहले डिप्रेशन के दौर से गुजरे थे. बात करें इच्छामृत्यु के दर्द कि तो मैंने अपने किसी करीबी को इस दर्द से गुजरते देखा था. इसलिए पर्दे पर इसे दिखाने में मैंने पूरी ईमानदारी दिखाई. भंसाली ने इस फिल्म के लिए हिंदी सिनेमा के ग्रीक गॉड कहे जाने वाले ऋतिक रोशन को चुना था. ऋतिक को इस किरदार में कल्पना करना भी आसान नहीं, मगर पर्दे पर उन्होंने इसे बखूबी निभाया था. ऋतिक तो इस स्क्रिप्ट को सुनकर रो पड़े थे, उनका कहना था कि ये लवस्टोरी है.
इच्छा मृत्यु पर आब्जेक्शन
गुजारिश में इच्छा मृत्यु दिखाने जाने को लेकर आदित्य देवन नाम के एक वकील ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक PIL दाखिल करवाई थी. उन्होंने कहा था कि इच्छा मृत्यु भारत में गैर-कानूनी है, इसलिए फिल्म के मेकर्स को शुरुआत में इस बारे में एक डिस्क्लेमर देना चाहिए. हालांकि कोर्ट ने उनकी इस मांग को खारिज कर दिया था.

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