
जब बर्फ में समा गईं कई जिंदगियां, अमेरिका से लेकर रूस तक मोरबी जैसे 10 भयानक हादसे
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अमेरिका से लेकर रूस और चीन से लेकर जापान तक इतिहास में कई बड़े ब्रिज हादसे हुए हैं. कहीं मरने वालों का आंकड़ा सैकड़ों में रहा तो कहीं हजारों लोग मारे गए. आज हम आपको ऐसे ही 10 ब्रिज हादसों के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने दुनिया को झकझोर कर रख दिया.
गुजरात के मोरबी में सस्पेंशन ब्रिज हादसे ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. शासन-प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा 135 लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा. ये पहली बार नहीं है, जब किसी ब्रिज के गिरने पर इतनी बड़ी तादाद में लोग मारे गए. भारत ही नहीं अमेरिका से लेकर ब्रिटेन और चीन से लेकर रूस तक इस तरह के तमाम हादसों से दुनिया का इतिहास भरा पड़ा है.
हम आपको दुनिया में हुए ऐसे 10 हादसों के बारे में बता रहे हैं, जिनमें मरने वालों की संख्या को अगर जोड़ दें तो तादाद कई हजारों में पहुंच जाएगी. इनमें सबसे भयावह पुर्तगाल में हुआ पांटून ब्रिज का हादसा है, जिसमें 4 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे. ये लोग अपनी जान बचाने के लिए ब्रिज के रास्ते से भाग रहे थे, लेकिन ब्रिज टूटने से ही उनकी जान चली गई. अमेरिका: होटल का वॉकवे गिरने पर मारे गए 117 लोग
अमेरिका के मिसौरी (Missouri) राज्य का कैंसास (Kansas) शहर. 1980 की शुरुआत में यहां हयात रीजेंसी होटल की शुरुआत हुई. होटल की इमारत को इतनी खूबसूरती से डिजाइन किया गया कि लोग देखते रह गए. तीसरी और चौथी मंजिल पर होटल की लॉबी में दो वॉकवे बनाए गए, जो लोगों को सीधे होटल की दूसरी इमारत में ले जाते थे. कैंसास में होने वाले सभी बड़े आयोजन हयात होटल में ही होते थे. 17 जुलाई 1981 को भी ऐसा ही एक आयोजन था. पार्टी में करीब 2 हजार लोग मौजूद थे. कुछ हॉल में चल रहे नाच-गाने में व्यस्त थे तो कुछ लॉबी में खड़े होकर पार्टी का लुत्फ उठा रहे थे. अचानक चौथी मंजिल का वॉकवे ढह गया. इसका मलबा तीसरी मंजिल के वॉकवे पर गिरा और तीसरी मंजिल का वॉकवे भी भरभराकर ढह गया. 114 लोग मारे गए. बाद में जांच हुई. पता चला कि होटल संचालकों के कहने पर इंजीनियर ने डिजाइन में कुछ बदलाव किए थे, यही हादसे का कारण बना.
रूस: जब जहाज पर गिरने लगीं मालगाड़ी में रखी कारें
5 जून 1983 को सोवियत (USSR) मेड अलेक्जेंडर सुवोरोव (Aleksandr Suvorov) जहाज 330 यात्रियों और चालक दल के 30 सदस्यों को लेकर रोस्तोव से मास्को के लिए निकला. इस लग्जरी शिप के सबसे ऊपरी डेक पर एक सिनेमा हॉल था, जिसमें ठीक रात 10 बजे कार्यक्रमों का प्रसारण होता था. हादसे वाली रात भी प्रोग्राम देखने के लिए जहाज की छत पर सैकड़ों लोग जमा हुए. जहाज 25 किलोमीटर प्रतिघंटे की गति से चल रहा था और शिप के कैप्टिन केबिन में आराम कर रहे थे. रात के अंधेरे में शिप को रेलवे ब्रिज के नीचे से गुजरना था, जूनियर कैप्टन जहाज और ब्रिज का सही कैलकुलेशन नहीं कर पाए और जहाज सीधे रेलवे ब्रिज से टकरा गया. ठीक इसी समय ब्रिज से एक मालगाड़ी गुजर रही थी, जिसमें कारें रखी हुई थीं. टक्कर लगते ही ट्रेन पटरी से उतर गई और ढेर सारी कारें जहाज पर आ गिरीं. 177 लोग मारे गए.
चीन: प्रकृति को बचाने की कीमत 41 लोगों की मौत

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