
जनजातीय कार्य मंत्रालय वनाधिकार प्रकोष्ठों में बदलाव की तैयारी में, ‘वन-स्टॉप’ समन्वय इकाइयां बनाने का फैसला
The Wire
जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 4 फरवरी को राज्यों के साथ हुई समीक्षा बैठक में ‘वन-स्टॉप’ परियोजना निगरानी इकाइयां (पीएमयू) बनाने का प्रस्ताव रखा, जो सभी नीतिगत मामलों में समन्वय का कार्य करेंगी. इस कदम से उन कई राज्यों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है जो पहले से ही वनाधिकार अधिनियम प्रकोष्ठ सेल गठित कर चुके हैं.
नई दिल्ली: वनाधिकार अधिनियम, 2006 के क्रियान्वयन में सहायता के लिए वनाधिकार अधिनियम प्रकोष्ठ (एफआरए सेल) को वित्तीय सहायता देने का कार्यक्रम शुरू करने के एक वर्ष बाद जनजातीय कार्य मंत्रालय ने राज्य और केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर इन प्रकोष्ठों के दायरे का विस्तार करने का निर्णय लिया है.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, एफआरए सेल को वित्तपोषित करने की व्यवस्था मंत्रालय के डीएजेजीयूए कार्यक्रम के तहत शुरू की गई थी, ताकि राज्यों को अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें और वनाधिकार दावों के निपटारे की प्रक्रिया तेज हो सके.
इसके अलावा इनका उद्देश्य अभिलेखों का रखरखाव और वनाधिकार पट्टों से जुड़े मौजूदा रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण भी था. पिछले वर्ष जून तक मंत्रालय ने 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जिला स्तर पर 324 प्रकोष्ठों तथा राज्य स्तर पर 17 प्रकोष्ठों को मंजूरी दी थी.
अखबार के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि 4 फरवरी को राज्यों के साथ हुई समीक्षा बैठक में मंत्रालय ने ‘वन-स्टॉप’ परियोजना निगरानी इकाइयां (पीएमयू) बनाने का प्रस्ताव रखा, जो सभी नीतिगत मामलों में समन्वय का कार्य करेंगी.
इस कदम से उन कई राज्यों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है जो पहले से ही एफआरए सेल गठित कर चुके हैं. पिछले सप्ताह ओडिशा सरकार ने 50 उप-संभागों में मौजूदा एफआरए सेल बंद करने का आदेश जारी किया, जिसे एक अधिकारी ने मंत्रालय की पुनर्गठन योजना का हिस्सा बताया.
छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने कहा कि राज्य फिलहाल पीएमयू बनाने की प्रक्रिया पर विचार कर रहा है और यह भी देख रहा है कि क्या मौजूदा एफआरए सेल वनाधिकार अधिनियम से बाहर के कार्यों का दायरा भी संभाल सकते हैं. हालांकि, मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई लिखित निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं.

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