
छत्तीसगढ़ में पादरियों, धर्मांतरित लोगों के प्रवेश निषेध संबंधी बोर्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार
The Wire
छत्तीसगढ़ के कुछ आदिवासी गांवों में पेसा क़ानून के तहत ग्राम सभाओं ने प्रस्ताव पारित कर धर्मांतरित ईसाइयों और पादरियों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए होर्डिंग लगाए थे, जिसे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सही ठहराया था. अब उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दी है.
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (16 फरवरी) को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, जिसमें ग्राम सभा द्वारा गांव के कुछ प्रवेश स्थलों पर ‘होर्डिंग्स’ लगाए जाने की कार्रवाई को सही ठहराया गया था. इन होर्डिंग्स के माध्यम से ईसाई पादरियों और धर्मांतरित ईसाइयों के गांव में प्रवेश पर रोक लगाई गई थी.
खबरों के मुताबिक, कुछ गांवों में होर्डिंग्स लगाए गए थे, जिनमें कहा गया था कि पंचायत (अनुसूचित जनजाति एरिया में विस्तार) एक्ट (पेसा) के तहत पादरियों और पुजारियों की एंट्री पर रोक है. बताया गया कि ग्राम सभा की यह कार्रवाई गांव के लोगों के जबरन या प्रलोभन के माध्यम से धर्मांतरण को रोकने के उद्देश्य से की गई थी.
कांकेर ज़िले के भानुप्रतापपुर तहसील में घोटिया ग्राम पंचायत ने एक होर्डिंग लगाया था जिसमें कहा गया था कि गांव पांचवी अनुसूची क्षेत्र में आता है और पेसा कानून के नियम लागू होते हैं और ग्राम सभा गांव की पहचान और संस्कृति की रक्षा करने के लिए सक्षम है. इसी प्रकार के होर्डिंग्स कुडल, परवी, जुनवानी, घोटा, हवेचुर, मुसुरपुट्टा और सुलंगी गांवों में भी लगाए गए थे.
लाइव लॉ के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्विस (याचिकाकर्ता की ओर से) और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया.
पीठ ने विवादित निर्णय के पैरा 34 का उल्लेख किया, जिसमें याचिकाकर्ता को सक्षम प्राधिकारी (ग्राम सभा) के समक्ष उचित उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी गई थी. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की प्रार्थना सीमित दायरे में थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में कई नए तथ्य और आयाम जोड़े गए हैं. इसलिए याचिकाकर्ता पुनः हाईकोर्ट का रुख कर सकता है.
28 अक्टूबर, 2025 के आदेश में हाईकोर्ट ने कहा था कि ये होर्डिंग्स जबरन, प्रलोभन या कपटपूर्ण तरीकों से किए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के उद्देश्य से लगाए गए हैं और इन्हें असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता. संबंधित ग्राम सभाओं द्वारा ये होर्डिंग्स स्थानीय आदिवासियों के हितों और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए एहतियाती उपाय के रूप में लगाए गए प्रतीत होते हैं.

आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार जूनियर डॉक्टर की मां ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार के रूप में पनिहाटी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने पर सहमति दे दी है. प्रदेश भाजपा की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. हालांकि भाजपा ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की है, जिसमें इस सीट पर कोई प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है.

केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि देशभर में 2017 से अब तक सीवर और सेप्टिक टैंक की ख़तरनाक सफाई के दौरान 622 सफाईकर्मियों की मौत हो चुकी है. 539 परिवारों को पूरा मुआवज़ा दिया गया, जबकि 25 परिवारों को आंशिक मुआवज़ा मिला. मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश 86 के साथ सबसे ऊपर है, इसके बाद महाराष्ट्र (82), तमिलनाडु (77), हरियाणा (76), गुजरात (73) और दिल्ली (62) का स्थान है.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोटद्वार के ‘मोहम्मद’ दीपक की याचिका पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि एक 'संदिग्ध आरोपी' होने के नाते वह अपनी मनचाही राहत, जैसे सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय जांच की मांग नहीं कर सकते. दीपक ने बीते महीने कोटद्वार में एक मुस्लिम बुज़ुर्ग के साथ दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा की जा रही बदसलूकी का विरोध किया था.

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच केंद्र सरकार भले ही एलपीजी की किल्लत से इनकार कर रही है लेकिन गैस एजेंसियों पर लंबी क़तारें हैं. गैस की किल्लत से जूझते लोगों के वीडियो सोशल मीडिया पर आ रहे हैं. वहीं, दिल्ली में कुछ अटल कैंटीन बंद हैं, कई हॉस्टल मेस और गुरुद्वारों में लंगर भी सिलेंडर की कमी प्रभावित हो रहे हैं.




