
चोकसी-माल्या जैसे लोगों को 'सेफ हैवेन' से निकाल लाना आसान नहीं, लंबी है ऐसे 'भगोड़ों' की लिस्ट
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मेहुल चोकसी, नीरव मोदी, विजय माल्या, ललित मोदी कई ऐसे नाम हैं जिन्हें जांच एजेंसियां देश में लाकर कानूनी कार्यवाही के दायरे में लाना चाहती हैं. लेकिन ये विदेशों के सेफ हैवेन में और पकड़ से दूर हैं.
भारत में 13500 करोड़ के पीएनबी घोटाले में वॉन्टेड हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को डोमिनिका से लाने की कोशिशें आजकल सुर्खियों में हैं. सीबीआई-ईडी जैसी कई एजेंसियों की टीमें डोमिनिका में डेरा डाले हुए हैं. भारत से घोटाले के खुलासे के बाद भागने, एंटीगुआ में शरण लेने, वहां की नागरिकता लेने और अब डोमिनिका में पकड़े जाने के बाद भी उसे वापस लाने के लिए मुश्किल राह बताती है कि दुनिया में कई सेफ हैवेन ऐसे आर्थिक अपराधियों के लिए गढ़ क्यों बने हुए हैं और इनपर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का कोई असर नहीं है. मामला केवल मेहुल चोकसी का नहीं है बल्कि विजय माल्या, नीरव मोदी, ललित मोदी जैसे और न जानें कितने आरोपी हैं जो देश में घोटालों और आर्थिक अपराध के आरोपी हैं लेकिन किसी और देश में शरण लेकर आराम की जिंदगी जी रहे हैं. इन्हें न्याय के कठघरे तक लाने की कोशिशें अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और कानूनों के जाल में फंसकर रह जा रही हैं और जांच कई-कई सालों तक कछुए की चाल से चलती रहती हैं.
जम्मू-कश्मीर के बडगाम में लोगों ने ईरान के समर्थन में सोना, चांदी और नकद दान किया. यह कदम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया है. लोग एक जगह इकट्ठा होकर मदद के लिए आगे आए. बडगाम के विधायक मुंतज़िर मेहदी ने भी एक महीने की सैलरी दान करने की घोषणा की. यह घटना दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का असर दूर तक हो रहा है और लोग इंसानियत के लिए साथ खड़े हो रहे हैं.

महाराष्ट्र के नासिक में खुद को धर्मगुरु बताने वाले अशोक कुमार खरात पर दुष्कर्म, शोषण, जबरन गर्भपात, ठगी और जमीन विवाद में हत्या जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. मामला एक गर्भवती महिला की शिकायत से सामने आया, जिसके बाद स्पाई कैमरे से 100 से ज्यादा वीडियो मिले. कई महिलाओं ने सालों तक शोषण का आरोप लगाया है. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और जांच जारी है, जिसमें और बड़े खुलासों की आशंका है.











