
'चुनाव प्रक्रिया में अदालती दखल नहीं', शिंदे सेना प्रत्याशी को HC नहीं मिली राहत, उम्मीदवारों को दी ये सलाह
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मुंबई नगर निगम चुनाव से जुड़े नामांकन विवादों में बॉम्बे हाईकोर्ट ने तात्कालिक हस्तक्षेप से इनकार कर दिया. शिंदे गुट की उम्मीदवार पूजा कांबले और AIMIM प्रत्याशी की याचिकाओं पर अदालत ने निचली अदालत या चुनाव याचिका का रास्ता अपनाने को कहा.
मुंबई और अन्य नगर निगम चुनावों से जुड़े मामलों में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को तत्काल दखल देने से इनकार कर दिया. मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम ए. अंखड की पीठ ने साफ कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान अदालत सीधे कोई आदेश पारित नहीं कर सकती और याचिकाकर्ताओं को पहले निचली अदालत या चुनाव याचिका का रास्ता अपनाना होगा.
इन्हीं मामलों में से एक याचिका शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) की उम्मीदवार पूजा कांबले की थी, जिन्होंने मुंबई के सायन-कोलीवाड़ा स्थित प्रतिक्षा नगर वार्ड से नामांकन दाखिल किया है. कांबले ने अदालत में आरोप लगाया कि उसी सीट से भाजपा उम्मीदवार शिल्पा केलुसकर ने फर्जी तरीके से “डुप्लिकेट” ए और बी फॉर्म के आधार पर नामांकन दाखिल किया है.
कांबले का दावा है कि बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के तहत यह सीट शिंदे गुट को दी गई थी और ऐसे में भाजपा द्वारा पहले जारी किए गए ए और बी फॉर्म बाद में वापस ले लिए गए थे. इसके बावजूद भाजपा उम्मीदवार का नामांकन स्वीकार किया गया, जो नियमों के खिलाफ है.
एडवोकेट विशाल आचार्य के जरिए दायर याचिका में कांबले ने केलुसकर का नामांकन रद्द करने, रिटर्निंग ऑफिसर को भाजपा का कमल चुनाव चिन्ह आवंटित करने से रोकने और सायन-कोलीवाड़ा क्षेत्र में भाजपा के प्रतीक चिन्ह से प्रचार पर रोक लगाने की मांग की थी.
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कई अन्य उम्मीदवारों ने भी की थी मांग

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