
चीन में गिरता बर्थ रेट... अस्पतालों में बंद हो रहे प्रसूति विभाग, पॉलिसी मेकर्स को चिंता- कपल में कैसे पैदा की जाए बच्चों की ललक!
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चीन इन दिनों सामाजिक संक्रमण के दौर से गुजर रहा है. चीन की वर्क फोर्स में अच्छी-खासी तादाद में युवतियां शामिल हो रही हैं. ये युवतियां करियर की रेस, बढ़ते खर्चे, जिम्मेदारियों से मुक्ति और एकाकीपन जैसे कुछ कारणों की वजह से बिना बच्चों के जिंदगी गुजारने का विकल्प चुन रही हैं. लेकिन इनका ये फैसला चीनी समाज के लिए कई चुनौतियां लेकर आ रहा है.
चीन के कई अस्पताल इन दिनों एक अलग ही समस्या से जूझ रहे हैं. यहां के कई हॉस्पिटल में बर्थ और डिलीवरी सेक्शन बंद होने के कगार पर हैं. इसकी वजह है चीन की कम होती जन्म दर. पिछले कुछ सालों से चीन की आबादी लगातार घट रही है. इन दिनों चीन में कम से कम महिलाएं गर्भवती हो रही हैं. इसका सीधा असर अस्पताल पर पड़ रहा है और यहां के बर्थ और डिलीवरी सेक्शन खाली पड़े हैं. शिशुओं की घटती संख्या का मतलब है कि कुछ अस्पताल प्रसूति विभाग को चालू नहीं रख सकते हैं और इस सेक्शन को ही बंद कर रहे हैं.
चीन की सरकारी न्यूज सर्विस डेली इकोनॉमिक न्यूज ने कहा है कि इस बार शिशु जन्म दर काफी कम रहने वाली है और अस्पतालों को 'सूखे' का सामना करना पड़ेगा.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार पूर्वी झेजियांग और दक्षिणी जियांग्शी समेत कई राज्यों के अस्पतालों ने पिछले दो महीनों में घोषणा की है कि वे अपने प्रसूति विभाग बंद कर देंगे.
जियांग्शी में गांझोउ शहर के 'द फीफ्थ पीपुल्स हॉस्पिटल' ने अपने आधिकारिक वी चैट अकाउंट पर कहा कि अस्पताल में 11 मार्च से प्रसूति सेवाएं उपलब्ध नहीं होंगी.
जियांग्शी ही नहीं झेजियांग के जियांगशान हॉस्पिटल ऑफ ट्रेडिशनल मेडिसिन ने अपने वी चैट पेज पर घोषणा की है कि उनका डिलीवरी सेक्शन 1 फरवरी से बंद हो गया है. बता दें कि वी चैट चीन में प्रचलित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है. ठीक भारत के एक्स और ट्विटर की तरह.
चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के ताजा उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि यहां प्रसूति अस्पतालों की संख्या 2020 में 807 से घटकर 2021 में 793 हो गई है.

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