
चीन की चुनौती से कैसे निपट रहा है भारत? एस जयशंकर ने बताया
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चीन के साथ जारी सीमा विवाद के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि सबसे पहले हमें दिखावा करना बंद करना होगा. एक वक्त था जब हम चीन को अपना रणनीतिक पार्टनर बुलाते थे. लेकिन अभी वो स्थिति नहीं है. अभी चीन बहुत बड़ी संख्या में अपनी सेना एलएसी के पास तैनात किए हुए है. काउंटर में हमने भी अपनी सैनिकों की तैनाती की है.
India Today Conclave 2024: इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के दो दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन के साथ भारत के संबंधों और भविष्य में चीन से निपटने की तैयारियों पर खुलकर बात की.
चीन के साथ संबंधों को लेकर उन्होंने कहा कि सबसे पहले हम यह स्वीकार करने की जरूरत है कि हमारा पड़ोसी बहुत ही चैलेंजिंग और कंपेटेटिव है. उसके साथ काफी गंभीर इश्यू हैं . यह सिर्फ एक सीमा विवाद ही नहीं है. बल्कि हम एक कॉमन पड़ोसी हैं. हमारी कॉमन भौगोलिक स्थिति है. इसके अलावा कई मेजर इकॉनमिक इश्यू भी हैं.
चीन एक चैलेंजिंग और कंपेटेटिव पड़ोसीः एस जयशंकर
उन्होंने आगे कहा कि अगर आप कहेंगे कि आपने क्या किया? तो हमने ईमानदारी से यह स्वीकार किया है चीन बहुत ही चैलेंजिंग और कंपेटेटिव पड़ोसी है. अगर हमें चीन से निपटना है तो हमें एक ऐसी अर्थव्यवस्था की जरूरत है जो इसके लिए तैयार हो. 2020 के गलवान संघर्ष के बाद चीन के साथ हमारे संबंध खराब हुए, लेकिन समय के साथ तनाव बढ़ ही रहा था. क्योंकि हम इसके प्रति ईमानदार नहीं थे. इसलिए हम खुद को स्पष्ट नहीं कर पा रहे थे और इसके अनुरूप रणनीति नहीं बना रहे थे.
चीन के साथ कैसे निपटेगा भारत?
विदेश मंत्री जयशंकर ने आगे कहा कि चीन से निपटने के लिए सबसे पहले आपको समस्या को पहचानना होगा. फिर इसके लिए खुद को तैयार करना होगा. फिर आप प्रतिक्रिया दें. इसके बाद ही आप इसे मैनेज कर सकते हैं.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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