
क्यों हर चुनाव में मुस्लिम बहुल सीटों पर भी सबसे बड़ी पार्टी बन जाती है BJP? बिहार का गणित समझिए
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बिहार चुनाव 2025 में मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर कौन सी पार्टी बढ़त में है...एनडीए या महागठबंधन? आमतौर पर माना जाता है कि मुसलमानों का झुकाव आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों वाले महागठबंधन की ओर रहता है लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बताते हैं. पिछली बार इन सीटों में से ज्यादातर पर एनडीए ने कब्जा जमाया था और अब सवाल है, क्या इस बार तस्वीर बदलेगी?
बिहार की मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में इस बार किस गठबंधन का पलड़ा भारी रहेगा? पहली नजर में जवाब महागठबंधन होगा. इसमें राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस, तीन वाम दल और विकासशील इंसान पार्टी शामिल हैं. वजह साफ है कि मुस्लिम वोटरों को आम तौर पर महागठबंधन का पारंपरिक समर्थक माना जाता है.
वहीं, आंकड़े कुछ और कहानी कहते हैं. बिहार की कुल 51 मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों में से 2020 के चुनाव में बीजेपी और उसके सहयोगियों ने 35 सीटें जीती थीं. यानी एनडीए की स्ट्राइक रेट लगभग 70 फीसदी रही जो राज्य के बाकी इलाकों से कहीं ज्यादा थी. साल 2010 में भी एनडीए का प्रदर्शन और बेहतर रहा था. 2015 में बीजेपी और जेडीयू के अलग-अलग चुनाव लड़ने के कारण सीटें घटीं, लेकिन हर बार बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी.
ये 51 सीटें बिहार के सात जिलों में किशनगंज, कटिहार, अररिया, पूर्णिया, दरभंगा, पश्चिम चंपारण और सीतामढ़ी फैली हैं. इनमें मुस्लिम आबादी 20 फीसदी से ज्यादा है. किशनगंज बिहार का एकमात्र जिला है जहां मुस्लिम बहुसंख्यक हैं. यहां मुस्लिम जनसंख्या करीब 68% है. कटिहार में ये अनुपात 45%, अररिया में 43% और पूर्णिया में करीब 38% है. बाकी तीन जिलों में मुस्लिम आबादी लगभग 22% है.
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