
क्यों बदल रहा PMO का पता? जानिए 'सेवा तीर्थ' की खास बातें
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देश की सत्ता का केंद्र अब 'साउथ ब्लॉक' से बदलकर 'सेवा तीर्थ' होने जा रहा है. सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बना नया प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) पूरी तरह तैयार है. 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर पीएम मोदी इस नए परिसर से अपने कामकाज की शुरुआत करेंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 14 जनवरी को मकर संक्रांति के मौके पर अपने नए कार्यालय 'सेवा तीर्थ' में शिफ्ट होने जा रहे हैं. सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत 1,189 करोड़ रुपये की लागत से बने इस परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) के लिए अलग-अलग भवन बनाए गए हैं. आजादी के बाद से अब तक पीएमओ साउथ ब्लॉक से संचालित होता था, लेकिन अब यह नए भवन 'सेवा तीर्थ-1' में स्थानांतरित हो जाएगा.
यह बदलाव औपनिवेशिक विरासत को त्यागने के विजन का हिस्सा है. इस परिसर का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो द्वारा किया गया है, जो 2,26,203 वर्ग फुट में फैला है.
कैबिनेट सचिवालय पिछले साल सितंबर में ही 'सेवा तीर्थ-2' में जा चुका है, जबकि 'सेवा तीर्थ-3' में एनएसए का कार्यालय होगा. पीएमओ के खाली होने के बाद साउथ और नॉर्थ ब्लॉक को 'युगे युगीन भारत संग्रहालय' नामक सार्वजनिक म्यूजियम में बदल दिया जाएगा.
तीन इमारतों का संगम है 'सेवा तीर्थ'
नया परिसर इस तरह से डिजाइन किया गया है कि सरकार के तीन सबसे महत्वपूर्ण विभाग एक ही जगह पर हों. 'सेवा तीर्थ-1' में प्रधानमंत्री कार्यालय होगा, जिसमें आधुनिक वर्कस्पेस और भव्य औपचारिक कक्ष बनाए गए हैं. 'सेवा तीर्थ-2' को पहले ही कैबिनेट सचिवालय को सौंपा जा चुका है. वहीं, 'सेवा तीर्थ-3' राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के कार्यालय के लिए आरक्षित है. यह एकीकरण प्रशासनिक दक्षता और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
म्यूजियम में बदलेंगे साउथ और नॉर्थ ब्लॉक

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