
क्या है Five Eyes जिसका सहारा लेकर कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो भारत को घेरने की कोशिश कर रहे हैं?
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कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो जिस FIVE EYES के इनपुट का सहारा लेकर भारत के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं वो खुद में ही एक ऐसा संगठन है जिसका काम ही दुनिया भर के लोगों की अवैध रूप से जासूसी करना है. ये देश इसके लिए अपनी सुरक्षा का हवाला देते हैं और तकनीक के दम पर दूसरों की सिक्योरिटी का दादागीरी से उल्लंघन करते हैं. ये संगठन बना तो 1946 में लेकिन इसको चलाने वाले एजेंसियों ने 1980 के दशक तक इसको दुनिया से छिपाये रखा.
The FIVE EYES (FVEY) पब्लिक सेफ्टी के नाम पर दुनिया के 5 शक्तिशाली देशों की दादागीरी है. औपनिवेशिक खुमारी में डूबे, अंग्रेजी बोलने वाले विश्व के 5 धनाढ्य देश अपनी सुरक्षा का हवाला देकर दुनिया में कहीं भी जासूसी, फोन टैपिंग, गुप्त ऑपरेशन और मिलिट्री और सिविल इंटेलीजेंस की गतिविधियों को अंजाम देते हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर बने इस 'कुलीन' क्लब में अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और ब्रिटेन शामिल हैं.
इन पांच देशों ने मिलकर ग्लोबल इंटेलिजेंस का एक खतरनाक नेटवर्क तैयार किया है. वैश्विक निगरानी से मिले इनपुट को ये पांच देश समय-समय पर अपने हित में इस्तेमाल करते हैं और जरूरत पड़े तो इसका प्रयोग दुनिया के दूसरे देशों पर नकेल कसने के लिए भी किया जाता है. चूंकि ये देश दुनिया के मंच पर ताकत और प्रतिष्ठा का लबादा ओढ़े हुए हैं इसलिए पिछले कई दशकों तक इनकी करनी पर सवाल उठाने वाला कोई नहीं था. लेकिन अब ग्लोबल ऑर्डर में टूट-फूट मचा हुआ है और इनके एक्शन पर लगातार सवाल भी उठाए जा रहे हैं.
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो अभी यही तरकीब भारत के खिलाफ इस्तेमाल करने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं. मगर भारत ने कनाडा को दो टूक और खरी-खरी सुनाकर बता दिया है कि The FIVE EYES की दबंगई और दादागीरी बर्दाश्त करने के लिए भारत के पास वक्त नहीं है.
आसान भाषा में कहें तो FIVE EYES दुनिया भर में जासूसी करने के लिए पांच देशों द्वारा मिलकर बनाया गया एक गुट है. इस जासूसी से मिले इनपुट को ये पांच देश आपस में साझा करते हैं. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार को आनन-फानन में बुलाये गये एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि कनाडा ने उन सभी सूचनाओं और इनपुट को फाइव आईज के देशों के साथ साझा किया है जिसमें कनाडा के मुताबिक पिछले साल खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या में भारतीय राजनयिकों के कथित रूप से शामिल होने के आरोप हैं.
दरअसल The FIVE EYES तब वजूद में आया जब दुनिया वर्ल्ड वार-2 के झटकों से गुजर रही थी. ब्रिटिश प्रभुत्व की समाप्ति, अमेरिका के सुपर पावर के रूप में उभरने और अमेरिकी वर्चस्व के खिलाफ सोवियत रूस के उदय ने पश्चिमी दुनिया में खलबली मचा दी. पश्चिमी देशों को अब ऐसे संगठन की जरूरत थी जो दुनिया भर में उनके शत्रुओं की टोह ले सके. इसके अलावा भी एक ऐसे संगठन की जरूरत थी जो दुनिया भर से खुफिया जानकारियां नीति और नियमों से परे जाकर भी इकट्ठा कर सके. फिर इन सूचनाओं को इन संगठन में शामिल देश आपस में साझा कर सकें और अपने कथित राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर सकें.
पिछले तीन-चार दशकों में चीन के उभार ने भी इन देशों को काउंटर बैलेंसिंग के लिए ऐसी खुफिया जानकारियां इकट्ठा करने के लिए एक फोरम पर आने को मजबूर किया.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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