
क्या है सरबत खालसा जिसे अपनी ढाल बनाना चाहता है भगौड़ा अमृतपाल सिंह?
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फरार अमृतपाल सिंह ने सरबत खालसा बुलाने की मांग की है. उसने एक वीडियो जारी कर कहा कि पंजाब को बचाने के लिए सिखों को एकजुट होना होगा. असल में सरबत खालसा एक तरह से सभा होती है जिसमें देश-विदेश से सिख जुटते हैं, मसलों पर चर्चा करते हैं और प्रस्ताव पास करते हैं.
'वारिस पंजाब दे' संगठन के मुखिया और खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल सिंह ने अपनी फरारी के दौरान एक वीडियो जारी किया है. वीडियो में अमृतपाल ने अपने खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को 'सिख समुदाय पर हमला' बताते हुए अकाल तख्त जत्थेदार से 'सरबत खालसा' बुलाने की अपील की है. उसने कहा, 'अगर हमें युवाओं और पंजाब को बचाना है तो सरबत खालसा का हिस्सा बनना चाहिए.'
क्या है सरबत खालसा?
सरबत खालसा असल में एक सभा है, जिसमें दुनियाभर से सिख समुदाय के संगठनों को बुलाया जाता है. इसमें कुछ मसलों पर चर्चा होती है और फैसले लिए जाते हैं. इन फैसलों को सभी मानते हैं. सरबत का मतलब 'सभी' और खालसा का मतलब 'सिख' होता है यानी सभी सिखों की एक सभा. जरूरी नहीं कि सभी सिख खालसा हों, पर हर खालसा सिख होता है.
बताया जाता है कि सबसे पहले 1708 में सरबत खालसा बुलाई गई थी. इसे सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह ने बुलाया था.
इसके बाद साल 1723 में सरबत खालसा बुलाई गई थी. उस समय तत खालसा और बंदै के बीच संघर्ष हो गया था. इसे सुलझाने के लिए सरबत खालसा बुलाई गई थी.
तीन साल बाद 1726 में भाई तारा सिंह के निधन के बाद सरबत खालसा बुलाई गई. इसी में 'गुरमाता' की परंपरा भी शुरू हुई. गुरमाता यानी सरबत खालसा के फैसले.

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