
कौशांबी में 5 अवैध अस्पताल सीज, दो झोलाछाप डॉक्टरों को नोटिस
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कौशांबी में स्वास्थ्य विभाग ने छापामारी कर 5 अवैध अस्पतालों को सीज कर दिया है. साथ ही दो झोलाछाप डॉक्टरों को नोटिस भी जारी किया है. जिला चिकित्साधिकारी सुष्पेंद्र कुमार के निर्देश पर नोडल अधिकारी डॉ. कुश शर्मा ने छापामारी की यह कार्रवाई की है.
यूपी के कौशांबी जिले में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है, जो बिना डिग्री अस्पताल और क्लीनिक चला रहे हैं. ये डॉक्टर इलाज के नाम पर लोगों की जिंदगी बचाने के बजाय मुश्किल में डाल रहे हैं. ऐसे झोलाछाप डाक्टरों पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मार कर 5 अस्पतालों को सीज कर दिया है. साथ ही दो को नोटिस भी जारी किया है. इस कार्रवाई से जिले में झोलाछाप डॉक्टरों में हड़कंप मचा हुआ है.
जिला चिकित्साधिकारी सुष्पेंद्र कुमार के निर्देश पर कड़ा ब्लाक क्षेत्र में नोडल अधिकारी डॉ. कुश शर्मा ने झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा चलाए जा रहे अस्पतालों पर छापामारी की कार्रवाई की है.
कार्रवाई की जद में आए अस्पतालों नीरज यादव क्लीनिक (सैनी सब्जी मंडी के बगल में), लक्ष्मी मेडिकल स्टोर व क्लीनिक (दिलावलपुर), संस्कार क्लीनिक (लेहदरी रोड गिरधरपुर गढ़ी) , आराध्या पॉली क्लीनिक फिजियोथेरेपी सेंटर (देवीगंज) और सहारा फार्मेसी एंड फार्मा क्लीनिक शामिल हैं.
प्रतिबंधित नारकोटिक्स दवाएं भी मिलीं नोडल अधिकारी डॉक्टर कुश शर्मा ने बताया कि अवैध अस्पताल जो चला रहे हैं, उनमें अधिकांश तय मानकों पर खरे नहीं हैं. यहां पदस्थ डॉक्टरों के पास या तो सिर्फ फार्मासिस्ट की डिग्री है, तो किसी के पास फिजियोथेरेपिस्ट की डिग्री है. कई ऐसे भी स्वास्थ्य कर्मी हैं जिनके पास कोई डिग्री नहीं है. कुछ तो कंपाउंडर बनने की ट्रेनिंग ले रहे हैं. उनके अस्पतालों से नारकोटिक्स दवाएं मिली हैं, जो कि प्रतिबंधित हैं. इन्हें ये दवाएं कहां से मिलीं इसका पता लगाया जा रहा है. अभी और भी छापामारी की जा रही है. सभी झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानें बंद कराई जाएंगी.
उन्होंने बताया ये अभियान तब तक चलता रहेगा, जब तक स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से दुरुस्त नहीं हो जाएंगी. सभी लोगों को बताया जा रहा है कि हो सके तो वे सरकारी अस्पतालों से ही इलाज करवाएं जहां सेवा निशुल्क है. यदि उनके पास साधन नहीं है तो 108, 102 को कॉल करें. 24 घन्टे डॉक्टर, फार्मासिस्ट और वार्डबॉय उपलब्ध रहते हैं. वहां सारी दवाएं और मशीनों का इंतजाम है. अगर वहां भी इलाज नहीं हो पाता तो एंबुलेंस के जरिए मरीजों को जिला अस्पताल भेजने की सुविधा भी उपलब्ध है.

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