
कोरिया, चीन, इटली और रूस.. 4 देशों के उदाहरण से समझें कैसे लो-पॉपुलेशन ग्रोथ की समस्या से निपट रहे दुनिया के मुल्क
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दुनियाभर में फर्टिलिटी रेट में गिरावट आ रही है. वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, 60 के दशक में दुनियाभर में एवरेज फर्टिलिटी रेट 5 से ज्यादा था. अभी दुनिया में औसत फर्टिलिटी रेट 2.3 है. दुनिया के कई देश तो ऐसे हैं जहां फर्टिलिटी रेट 1 से भी कम हो गई है.
इस समय पूरी दुनियाभर में आबादी पर चर्चा की जा रही है. भारत इसी साल चीन को पछाड़कर आबादी के मामले में पहले पायदान पर पहुंच गया है. लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने जनसंख्या को लेकर एक और बयान दिया है, जिस पर यह विषय एक बार फिर चर्चा में आ गया है.
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का कहना है कि एक दंपति को कम से कम तीन बच्चे पैदा करने चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी समाज में फर्टिलिटी रेट यानी प्रजनन दर 2.1 से नीचे आ जाती है तो वो अपने आप ही खत्म हो जाता है. इस समय भारत में फर्टिलिटी रेट 2.0 है. फर्टिलिटी रेट यानी प्रजनन दर का मतलब होता है कि एक महिला अपने जीवनकाल में औसतन कितने बच्चों को जन्म दे रही है.
लेकिन सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में फर्टिलिटी रेट में गिरावट आ रही है. वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, 60 के दशक में दुनियाभर में एवरेज फर्टिलिटी रेट 5 से ज्यादा थी. अभी दुनिया में औसत फर्टिलिटी रेट 2.3 है. दुनिया के कई देश तो ऐसे हैं जहां फर्टिलिटी रेट एक से भी कम हो गई है.
फर्टिलिटी रेट बढ़ाने के लिए सरकारें कई तरह की तरकीबें अपना रहीं हैं. चीन की 'वन चाइल्ड पॉलिसी' अब 'थ्री चाइल्ड पॉलिसी' में तब्दील हो गई है. ज्यादा बच्चे पैदा करने पर इंसेंटिव, बोनस और सुविधाओं को प्रलोभन दिया जा रहा है. जापान में सब्सिडी, डेकेयर और जॉब सिक्योरिटी के वादे किए जा रहे हैं. साउथ कोरिया की सरकार बच्चे पैदा करने वाले परिवारों की मदद के लिए 200 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च कर चुकी है. लेकिन ये सारी तरकीबें काम नहीं आ रहीं हैं और फर्टिलिटी रेट लगतार घट रही है.
क्या गायब हो जाएगा साउथ कोरिया?
गिरती फर्टिलिटी रेट का सबसे बुरा असर साउथ कोरिया पर हो रहा है. साउथ कोरिया में फर्टिलिटी रेट 0.72 पहुंच गई है और ऐसी आशंका है कि 2100 तक यहां की आबादी आधी हो जाएगी.

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