
किसी का विरोध करने के लिए नहीं, कांग्रेस को मजबूत करने के लिए उम्मीदवार बना, बोले खड़गे
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कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव में 30 सितंबर को नामांकन का आखिरी दिन था. इस चुनाव में शशि थरूर और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच मुकाबला है. तीसरे प्रत्याशी का नामांकन निरस्त हो गया है. चुनाव में 8 अक्टूबर को पर्चा वापसी की आखिरी तारीख है. अगर किसी ने नामांकन वापस नहीं लिया तो 17 अक्टूबर को वोटिंग होगी और 19 अक्टूबर को नतीजे आएंगे.
कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में किसी का विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि पार्टी को मजबूत करने के लिए मैदान में उतरा हूं. खड़गे ने कहा कि महात्मा गांधी ने इस देश को आजादी दिलाई तो लाल बहादुर शास्त्री ने देश को एक रखकर जय जवान जय किसान का नारा देकर मजबूत बनाया. प्रदेश सुरक्षित रखा. इन दोनों को प्रणाम करके मैं चुनाव प्रचार शुरू कर रहा हूं.
बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव में 30 सितंबर को नामांकन का आखिरी दिन था. इस चुनाव में शशि थरूर और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच मुकाबला है. तीसरे प्रत्याशी का नामांकन निरस्त हो गया है. चुनाव में 8 अक्टूबर को पर्चा वापसी की आखिरी तारीख है. अगर किसी ने नामांकन वापस नहीं लिया तो 17 अक्टूबर को वोटिंग होगी और 19 अक्टूबर को नतीजे आएंगे.
मैं उसूलों और आइडिलॉजी के लिए बचपन से लड़ा हूं: खड़गे
खड़गे ने कहा कि 'एक व्यक्ति, एक पद' के फॉर्मूला के तहत मैंने राज्यसभा में नेता विपक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया है. आपको मेरे 50 साल के राजनीतिक जीवन के बारे में पता है. मैं अब तक उसूलों और आइडियोलॉजी के लिए बचपन से लड़ता रहा हूं. बचपन से ही मेरे जीवन में संघर्ष रहा है. सालों तक मंत्री रहा और विपक्ष का नेता भी बना. सदन में बीजेपी और संघ की विचारधारा के खिलाफ लड़ता रहा. मैं फिर लड़ना चाहता हूं और लड़कर उसूलों को आगे ले जाने की कोशिश करूंगा.
पार्टी में फुल टाइम काम करना होता है
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि पार्टी में काम करना फुल टाइम वर्क है. संसद में जब जाता था तो शाम को ही निकल पाता था. मुझे चुनाव लड़ने का मौका मिला है. मेरे वरिष्ठ नेताओं और शुभचिंतकों और युवा नेताओं ने कहा है कि देश की ज्वलंत समस्याओं बेरोजगारी, महंगाई से लोग जूझ रहे हैं. अमीर और अमीर हो रहा है. गरीब और गरीब हो रहा है. इन सब चीजों को देखते हुए खासकर इस 8 साल में जो वादे बीजेपी ने किए हैं, वे निभाए नहीं हैं.

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