
कार्यकर्ता को मान,राम मंदिर आंदोलन को सम्मान, बाहरी और महिलाओं का ध्यान... बीजेपी के राज्यसभा कैंडिडेट्स के चयन की रणनीति समझिए
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बीजेपी के राज्यसभा उम्मीदवारों की लिस्ट से कई केंद्रीय मंत्रियों के नाम नदारद हैं. पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत चार पुराने नाम हैं तो वहीं विधानसभा चुनाव हार चुके नेताओं के साथ ही कांग्रेस छोड़कर आए नेताओं को भी पार्टी ने उच्च सदन का टिकट थमा दिया है. राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन के पीछे बीजेपी की रणनीति क्या है?
राज्यसभा की 56 सीटों के लिए चुनाव होने हैं.इन 56 सीटों में से आधी यानी करीब 28 राज्यसभा सीटें केंद्र की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खाते में आएंगी. जिन 28 सीटों पर बीजेपी के लिए बीजेपी ने जिन उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है उनमें पुराने चेहरे नाम मात्र के ही हैं. बीजेपी की ओर से घोषित 28 में से महज चार चेहरे ही पुराने हैं. बीजेपी ने जिन चार चेहरों को फिर से राज्यसभा का टिकट दिया है, उनमें पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और एल मुरुगन शामिल हैं.
पार्टी ने इन चार चेहरों के अलावा 24 नए चेहरों पर दांव लगाया है. बीजेपी के राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में किसी भी नेता को दो बार से अधिक राज्यसभा नहीं भेजने की अघोषित नीति पर विराम नजर आ रहा है तो साथ ही कार्यकर्ताओं को मान, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों और राम मंदिर निर्माण में सर्वाधिक चंदा देने वालों को सम्मान, कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए नेताओं और महिलाओं का ध्यान भी नजर आ रहा है.
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आइए, समझते हैं कि बीजेपी के राज्यसभा कैंडिडेट्स के चयन में रणनीति क्या रही है?
1. बड़े चेहरों को लोकसभा से लाने की रणनीति
राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी उम्मीदवारों के ऐलान के साथ ही इन कयासों पर भी मुहर लग गई है कि इस बार पार्टी राज्यों के चुनाव की तर्ज पर लोकसभा चुनाव में भी बड़े नेताओं, केंद्रीय मंत्रियों को उतारेगी. केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, धर्मेंद्र प्रधान, मनसुख मांडविया, नारायण राणे, पुरषोत्तम रुपाला, वी मुरलीधरन और राजीव चंद्रशेखर को इस बार राज्यसभा का टिकट नहीं मिला है.

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