
कांग्रेस के एक सदस्य के लिए राजनीतिक विकल्प बनने के क्या अर्थ हैं
The Wire
'देश को एक राजनीतिक विकल्प देने के लिए मेरी अपनी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अपने असली अस्तित्व को फिर से खोजने की ज़रूरत होगी.'
‘विकल्प’ और खासतौर से ‘राष्ट्रीय विकल्प’ एक ऐसा विचार है जो इन दिनों अक्सर कई राजनीतिक चर्चाओं में सुनाई देता है. कुछ लोग राष्ट्रीय विकल्प के न होने पर दुख व्यक्त करते हैं; कुछ इसके लिए एक साथ आने का दावा करते हैं. कुछ के ‘राष्ट्रीय विकल्प’ के तौर पर उभरने की घोषणा की जाती है और फिर कुछ अन्य अपने ऐसा होने का दावा करते हैं.
वर्तमान व्यवस्था के विकल्प का विचार महत्वपूर्ण है. भारतीय लोकतंत्र एक नहीं, बल्कि कई विकल्पों का हकदार है. लेकिन वास्तव में ऐसा क्या है जिसके लिए हमें विकल्पों की जरूरत है? अधिकांश लोगों के लिए इस सवाल का जवाब चुनाव के रोज़ किसी भी तरह भाजपा का विकल्प बनने; या देश के मसीहा रूप में नरेंद्र मोदी की छवि का विकल्प बनने तक सीमित है.
लेकिन इनमें से कुछ भी देश के लिए किसी पार्टी, गठबंधन या नेता को राजनीतिक विकल्प नहीं बना देता. एक राजनीतिक विकल्प को न केवल सरकार में बैठे लोगों और प्रतीकों का विकल्प होना चाहिए, बल्कि देश को चलाने वाली सत्ता की संरचना का भी विकल्प बनना चाहिए.
आज हमारे देश को चलाने वाली सत्ता की संरचना तीन इजारेदारों का गठबंधन है:

कैम्पेन अगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन (सीएएसआर) ने आरोप लगाया है कि दिल्ली में दो मज़दूर अधिकार कार्यकर्ताओं, दो विस्थापन-विरोधी कार्यकर्ताओं और छह छात्रों को 'अधिकारियों' ने उठा लिया है और उनका अब तक कोई पता नहीं है. संगठन ने उनके ठिकाने की जानकारी, सुरक्षा की गारंटी और कानूनी सहायता सुनिश्चित करने की मांग की है.

महाराष्ट्र में एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने से पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना प्रभावित होने की आशंका जताई गई है. प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने बीपीसीएल और एचपीसीएल से स्वयं सहायता समूहों और केंद्रीय रसोईघरों के लिए सिलेंडरों की प्राथमिक आपूर्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है, ताकि छात्रों के भोजन पर असर न पड़े.

लोकसभा में सपा सांसद धर्मेंद्र यादव के सवाल के जवाब में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि मणिकर्णिका घाट एएसआई के तहत संरक्षित स्मारक नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि घाट पर चल रहा कार्य घाट की गरिमा को बहाल करने के उद्देश्य से किए जा रहे जीर्णोद्धार और संरक्षण परियोजना का हिस्सा है.

देश में एलपीजी गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के बीच गुरुवार को संसद में जारी बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान ज़ोरदार हंगामा देखने को मिला. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सरकार पर इस मुद्दे पर ग़लत जानकारी देने का आरोप लगाया और इस पर संसद के भीतर विस्तृत चर्चा की मांग की. हालांकि, सरकार का कहना है कि देश के पास पर्याप्त भंडार हैं.

ईरान संघर्ष के बीच कंटेनर जहाजों की कमी के कारण कच्चे माल की कीमतों में करीब 30% की बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते भारत में दवाओं के दाम तेज़ी से बढ़ने की आशंका है. उद्योग से जुड़े लोगों ने कहा कि जहाजों की कमी के कारण चीन से आने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) की आपूर्ति प्रभावित हुई है. चीन भारतीय दवा निर्माताओं के लिए कच्चे माल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है.








