
कहीं वापसी, कहीं विदाई... 2024 में 70 देश चुनेंगे अपनी नई सरकार, कैसे बदलेगी दुनिया की सियासत?
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2024 चुनावी साल है. इस साल दुनिया के 70 से ज्यादा देशों में चुनाव होंगे. कहीं सरकारें वापसी करेंगी, तो कहीं मौजूदा सरकारों की विदाई होगी. हर देश के चुनाव दुनिया की सियासत पर भी पड़ता नजर आएगा. समझते हैं कि इन मुल्कों के चुनाव कैसे दुनिया की सियासत को बदलेंगे?
2024 चुनावी साल है. न सिर्फ भारत के लिए बल्कि दुनियाभर के लिए. इस साल 70 से अधिक देशों में चुनाव होने हैं, जिनमें चार अरब से अधिक लोग वोट डालेंगे. एशिया से लेकर अफ्रीका और यूरोप तक हर महाद्वीप चुनावी मूड में रहेगा. 27 देशों वाला यूरोपियन यूनियन भी चुनावी रंग में रंगने जा रहा है. इन चुनावों से दुनिया कितनी बदलेगी? किस तरह के समीकरण बनेंगे-बिगड़ेंगे? ये तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन पूर्व के घटनाक्रमों को देखें तो उनमें आने वाले समय की तस्वीर देखने को मिल सकती है.
शुरुआत करते हैं साल 2022 से. यह साल रूस और यूक्रेन युद्ध की त्रासदी लेकर आया. इस युद्ध ने वैश्विक समीकरण तेजी से बदले. पूरी दुनिया दो खेमों में बंटी नजर आई. लेकिन 2023 में ये वैश्विक बदलाव और तेज हुआ. ताइवान की वजह से जहां एक तरफ अमेरिका और चीन की कड़वाहट बढ़ी. तो वहीं, इजरायल और हमास जंग ने जमकर तबाही मचाई, जिससे मिडिल ईस्ट का संकट और गहरा गया. इस तरह बीते कुछ सालों से पूरी दुनिया में जो उथल-पुथल मची है, उसमें इस चुनावी साल में बनने वाली नई सरकारों की क्या भूमिका रहने वाली है इसपर सबकी नजर रहेगी.
कहां-कहां होंगे चुनाव?
एशियाई देशों की बात करें तो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, भूटान, ताइवान, इंडोनेशिया और मालदीव में आम चुनाव हैं. बांग्लादेश में संसदीय चुनाव हो चुके हैं. यूरोप के भी दर्जनभर से ज्यादा देशों में इस साल वोट डाले जाएंगे, जिनमें पुर्तगाल से लेकर बेलारूस, फिनलैंड, यूक्रेन और स्लोवाकिया तक शामिल हैं. अफ्रीकी देशों में इस साल सबसे अधिक चुनाव हैं, जहां दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा एक बार फिर सत्ता में लौटने की तैयारी कर रहे हैं. वहीं, चाड, घाना, कोमोरोस, अल्जीरिया, बोत्सवाना, मॉरीशस, मोजाम्बिक, मॉरिटानिया, रवांडा, सेनेगल, सोमालीलैंड और ट्यूनीशिया में भी वोट डाले जाएंगे. इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, मेक्सिको और ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में भी चुनाव होने हैं.
चुनावों से कितनी बदलेगी जियोपॉलिटिक्स?
हर चुनाव में हार-जीत के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समीकरण बदलते हैं. सबसे ज्यादा असर पड़ता है, वहां की जियोपॉलिटिक्स पर. इस साल भारत के लोकसभा चुनावों पर सभी की नजरें होंगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैट्रिक के इरादे से चुनावी मैदान में उतरेंगे. सत्तारूढ़ बीजेपी के खिलाफ मैदान में होगा INDIA गठबंधन. इन चुनावों में देश की 95 करोड़ जनता वोट डालेगी.

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को कहा कि वैश्विक आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को कम करने में मदद करने के लिए अमेरिका जल्द ही टैंकरों में फंसे ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटा सकता है. बेसेंट ने कहा कि प्रतिबंधित ईरानी तेल के वैश्विक आपूर्ति में शामिल होने से अगले 10 से 14 दिनों तक तेल की कीमतें कम रखने में मदद मिलेगी.

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अमेरिकी अधिकारियों के वॉशिंगटन आर्मी बेस के ऊपर कुछ अनजान ड्रोन देखे जाने बाद वहां हड़कंप मच गया है. इसी बेस पर विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ रहते हैं. अभी तक ये पता नहीं लग पाया है कि ये ड्रोन कहां से आए थे. इसके बाद सुरक्षा और बढ़ा दी गई है. इस पर व्हाइट हाउस में एक बैठक भी हुई है, जिसमें इस बात पर चर्चा हुई है कि इन हालातों से कैसे निपटा जाए.







