
कश्मीर में हो रही हत्याओं को धर्म के आधार पर देखना बंद करें: एलजी मनोज सिन्हा
The Wire
जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक कार्यक्रम में कहा कि कश्मीरी पंडित टारगेटेड हत्याओं का शिकार हैं, लेकिन देश को इन्हें धर्म के आधार पर देखना बंद करना चाहिए क्योंकि बहुत से अन्य लोग भी मारे गए हैं. बीते कई महीने से जम्मू में प्रदर्शनरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने इस पर रोष जताया है.
नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि यह तथ्य है कि कश्मीरी पंडित निशाना बनाकर की जा रही हत्याओं (टारगेटेड किलिंग) का शिकार हैं, लेकिन देश को इन्हें धर्म के आधार पर देखना बंद करना चाहिए क्योंकि बहुत से अन्य लोग भी मारे गए हैं.
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, बीते शुक्रवार को इस अख़बार समूह के ‘आइडिया एक्सचेंज’ कार्यक्रम में सिन्हा ने कहा, ‘यह सच है कि कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुई हैं और कश्मीरी पंडित लक्षित हमलों के शिकार हुए हैं, लेकिन एक दूसरा पक्ष भी है. इसे धर्म के आधार पर देखने की कोशिश देश को बंद कर देनी चाहिए. काफी संख्या में दूसरे लोग भी मारे गए हैं.’
उन्होंने आगे कहा, ‘मैं यह कहना चाहता हूं कि कश्मीर घाटी के लोग भी मारे गए हैं. इसके साथ ही बिहार, ओडिशा, झारखंड से सेब के सीज़न में आने वाले श्रमिक भी थे… दो-तीन घटनाएं हुई हैं लेकिन एक फर्जी नैरेटिव फैलाया जा रहा है.’
उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग हैं जो अपने आप को स्थानीय या बाहरी बताते हैं… हमें इसमें नहीं पड़ना चाहिए. जो लोग निवासी (डोमिसाइल) हैं उनका मानना है कि केंद्रशासित प्रदेश की अर्थव्यवस्था में उनकी (मजदूरों की) बहुत बड़ी भूमिका है. उनकी इसके विकास में भूमिका है. जम्मू और कश्मीर भारत का हिस्सा है. कोई भी किसी भी राज्य में काम कर सकता है… उन्हें यहां काम करने का अधिकार है. वही बात कश्मीर के लिए है. कश्मीर में बहुसंख्यक हैं जो इसकी सराहना करते हैं और चाहते हैं कि दूसरे लोग आएं और काम करें. हम उनका (प्रवासियों का) ख्याल भी रखते हैं… उनके बीमा के लिए जोर देते हैं. सेब के सीजन के दौरान हमने उनकी वित्तीय और सामाजिक – दोनों तरह की सुरक्षा के संबंध में दिशानिर्देश भी दिए थे.’

आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार जूनियर डॉक्टर की मां ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार के रूप में पनिहाटी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने पर सहमति दे दी है. प्रदेश भाजपा की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. हालांकि भाजपा ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की है, जिसमें इस सीट पर कोई प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है.

केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि देशभर में 2017 से अब तक सीवर और सेप्टिक टैंक की ख़तरनाक सफाई के दौरान 622 सफाईकर्मियों की मौत हो चुकी है. 539 परिवारों को पूरा मुआवज़ा दिया गया, जबकि 25 परिवारों को आंशिक मुआवज़ा मिला. मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश 86 के साथ सबसे ऊपर है, इसके बाद महाराष्ट्र (82), तमिलनाडु (77), हरियाणा (76), गुजरात (73) और दिल्ली (62) का स्थान है.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोटद्वार के ‘मोहम्मद’ दीपक की याचिका पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि एक 'संदिग्ध आरोपी' होने के नाते वह अपनी मनचाही राहत, जैसे सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय जांच की मांग नहीं कर सकते. दीपक ने बीते महीने कोटद्वार में एक मुस्लिम बुज़ुर्ग के साथ दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा की जा रही बदसलूकी का विरोध किया था.

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच केंद्र सरकार भले ही एलपीजी की किल्लत से इनकार कर रही है लेकिन गैस एजेंसियों पर लंबी क़तारें हैं. गैस की किल्लत से जूझते लोगों के वीडियो सोशल मीडिया पर आ रहे हैं. वहीं, दिल्ली में कुछ अटल कैंटीन बंद हैं, कई हॉस्टल मेस और गुरुद्वारों में लंगर भी सिलेंडर की कमी प्रभावित हो रहे हैं.




