
कलाई की ये रेखा बताती है कितने साल जिएंगे आप, छिपा है अमीर होने का भी सीक्रेट
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हथेली, अंगूठा या अंगुलियों पर मौजूद सभी रेखाओं का अपना एक अलग महत्व होता है जिसे देखकर इंसान के जीवन की भविष्यवाणी की जा सकती है. इस आर्टिकल में आज हम आपको ब्रेसलेट लाइन के बारे में बताने जा रहे हैं. ये हॉरीजॉन्टल लाइन्स (क्षैतिज रेखाएं) हमारी कलाई पर अंदर की तरफ होती हैं.
हस्तरेखा शास्त्र के जरिए एक इंसान के स्वभाव और भविष्य के बारे में बताया जाता है. भारत में इस कला का चलन हजारों साल पुराना है. हस्तरेखा शास्त्र आज दुनियाभर में प्रसिद्ध हो चुका है और इसके विभिन्न पहलुओं पर शोध भी हो रहे हैं. हथेली, अंगूठे या अंगुलियों पर मौजूद सभी रेखाओं का अपना एक अलग महत्व होता है, जिसे देखकर इंसान के जीवन की भविष्यवाणी की जा सकती है. इस आर्टिकल में आज हम आपको ब्रेसलेट लाइन के बारे में बताने जा रहे हैं. ये हॉरीजॉन्टल लाइन्स हमारी कलाई पर अंदर की तरफ होती हैं.
हस्तरेखा शास्त्र में ब्रेसलेट लाइन का बड़ा महत्व बताया गया है. कलाई पर मौजूद यह रेखा इंसान की उम्र, स्वास्थ्य, वित्तीय पहलू के अलावा बहुत कुछ बताती है. हस्तरेखा शास्त्र के मुताबिक, किसी इंसान की आयु उसकी कलाई पर मौजूद ब्रेसलेट लाइन की संख्या पर निर्भर करती है. यदि किसी इंसान की कलाई पर ज्यादा ब्रेसलेट लाइन है तो उसकी उम्र ज्यादा होगी. ठीक इसी तरह, कलाई पर कम ब्रेसलेट लाइन का मतलब कम उम्र से होता है.
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, कलाई पर पहली ब्रेसलेट लाइन बताती है कि इंसान की उम्र 23-28 साल होगी. जबकि दूसरी ब्रेसलेट लाइन का मतलब कोई इंसान 46-56 साल जिएगा. वहीं, तीसरी ब्रेसलेट लाइन 69-84 की उम्र दर्शाती है.
1. कलाई की पहली ब्रेसलेट लाइन बहुत महत्वपूर्ण होती है. अगर ये लाइन एकदम साफ और पूर्ण परिभाषित है तो इसका मतलब इंसान एक स्वस्थ जीवन का आनंद लेने वाला है. ऐसे लोग गजब की मानसिक और शारीरिक शक्ति के धनी होते हैं. हालंकि, इस लाइन का स्पष्ट और पूर्ण परिभाषित ना होना इंसान को कमजोर और लापरवाह बनाता है.
2. ब्रेसलाइट लाइन सेहत से जुड़ी समस्याओं को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण होती हैं. महिलाओं की कलाई पर अगर पहली ब्रेसलेट लाइन टूटी या घुमावदार (कर्व्ड) हो तो ये स्त्री संबंधी रोग या गर्भावस्था से जुड़ी समस्याओं की ओर इशारा करती है.
3. वहीं, पुरुषों में अगर पहली ब्रेसलेट लाइन टूटी या घुमावदार हो तो ऐसे लोगों को प्रजनन (रीप्रोडक्शन) से जुड़ी समस्याओं की संभावना अधिक रहती है. ऐसे लोग यूरीनरी ट्रैक्ट और प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याओं का शिकार हो सकते हैं.

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