
कभी दिल्ली का विलेन, कभी लाइफ लाइन... हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज की कहानी
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दिल्ली में आई बाढ़ के बीच हथिनीकुंड बैराज का नाम बार-बार चर्चा में रहा. टीवी-अखबारों में लगातार आता रहा कि हथिनीकुंड बैराज से यमुना में पानी छोड़ा जा रहा है, जिसकी वजह से खतरा बढ़ रहा है. लेकिन हथिनीकुंड बैराज हर बार दिल्ली के लिए विलेन बनकर ही नहीं आता है.
यमुना नदी हरियाणा के पल्ला से दिल्ली में दाखिल होती है और दिल्ली के जैतपुर से आगे उत्तर प्रदेश की सीमा में दाखिल हो जाती हैं. आंकड़ों के हिसाब से यमुना में 26 ब्रिज और 3 बैराज हैं, जिनसे लोगों की आवाजाही और पानी को मैनेज किया जाता है.
राजधानी दिल्ली में पिछले दिनों जब बाढ़ आई तो 40 सालों का रिकॉर्ड टूट गया. इस दौरान जलस्तर 208.66 मीटर पर पहुंच गया था. एक तरफ इस बाढ़ से लोगों को परेशानी हुई तो दूसरी इसपर सिसायत भी खूब हुई.
आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि हथिनीकुंड बैराज के पानी का वितरण ठीक नहीं हुआ. वहीं बीजेपी शासित हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने इसे नकार दिया.
ऐसे में समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर क्यों हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़ा जाए तो दिल्ली में बाढ़ का खतरा हो जाता है और गर्मियों के मौसम में बैराज से पानी ना छोड़ा जाए तो दिल्ली वालों को पानी की कमी हो जाती है.
पहले पानी की अधिकता से दिल्ली में बाढ़ क्यों आ जाती है इसको समझ लेते हैं. हरियाणा जिले के यमुनानगर में हथिनी कुंड बैराज का निर्माण साल 1996 में शुरू होकर साल 1999 में पूरा हुआ. इसके बाद इसको पूरी तरह खोल दिया गया. 168 करोड़ रुपए की लागत से बने 360 मीटर लंबे बैराज का संचालन हरियाणा कर रहा है जिसमें करीब 10 गेट पानी के नियंत्रण के लिए बनाए गए हैं. बैराज इतना महत्वपूर्ण है कि देश के पांच राज्यों में पानी की आपूर्ति करता है.
कब कितना पानी यमुना नदी में छोड़ा जाता है?

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