
'कभी ट्रेन में अंडरवियर, कभी अस्पताल में पिस्टल...', बवाली है JDU विधायक गोपाल मंडल का इतिहास
AajTak
अपने बिहेवियर से सुर्खियों में रहने वाले जेडीयू विधायक गोपाल मंडल इस बार दबंगई को लेकर चर्चा में हैं. पत्रकारों के सवाल, 'अस्पताल जैसी जगह पर पिस्टल ले जाने की क्या जरूरत थी? विधायक क्या पिस्टल हाथ में लेकर लहराएंगे?' इस सवाल ने मानो विधायक के सम्मान पर कुठाराघात कर दिया.
अपने बिहेवियर से सुर्खियों में रहने वाले जेडीयू विधायक गोपाल मंडल इस बार दबंगई को लेकर चर्चा में हैं. वो पटना में जनता दल यूनाइटेड ऑफिस पहुंचे थे. यहां पत्रकारों के सवाल, 'विधायक जी आप पिस्टल लहराते हुए अस्पताल में क्यों गए थे?' इस पर विधायक का पारा कुछ इस कदर हाई हुआ कि वो आपा खो बैठे और गालियां देनी शुरू कर दी.
विधायक गोपाल मंडल कहने लगे- 'हां, हम अभियो (अभी भी) रखे हैं, दिखाएं क्या. क्या कहना चाहते हो... रखते हैं पिस्टल. इसके बाद सवाल हुआ, 'अस्पताल जैसी जगह पर पिस्टल ले जाने की क्या जरूरत थी? विधायक क्या पिस्टल हाथ में लेकर लहराएंगे?'
'हां, हां... हम लहराएंगे.... तुम लोग हमारा बाप हो क्या'
इस सवाल ने मानो विधायक के सम्मान पर कुठाराघात कर दिया. तमतमाते हुए विधायक ने कहा- 'हां, हां... हम लहराएंगे.... तुम लोग हमारा बाप हो क्या.. भाग...$$$$''. हैरानी वाली बात तो ये है कि जिस समय जेडीयू दफ्तर के गेट पर विधायक अपनी दबंगई के सबूत दे रहे थे, उस समय सूबे के मुखिया नीतीश कुमार दफ्तर के अंदर मौजूद थे.
हाथ में पिस्टल, सुरक्षा गार्ड और अस्पताल में विधायक
दरअसल, बीते दिनों गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक नरेंद्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल मायागंज के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय में पिस्टल लेकर पहुंचे थे. उनके साथ सुरक्षा गार्ड भी थे. विधायक के हाथ में रिवॉल्वर देख लोग डरे सहमे नजर आए थे. इसके बाद वो वहां से अपने सुरक्षा गार्ड के साथ हाथ में पिस्टल लेकर वापस निकल गए.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.








