
एक थप्पड़ ने विनोद उपाध्याय को बना दिया था पूर्वांचल का बड़ा गैंगस्टर, STF ने किया 35 अपराधों का हिसाब
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पूर्वांचल के माफिया और गैंगस्टर विनोद उपाध्याय ने 2005 में पहली हत्या के बाद महज दो सालों में ही राजनीतिक रसूख भी बना लिया था. उसने बीएसपी से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी थी. साल 2007 में बसपा ने विनोद उपाध्याय को गोरखपुर का प्रभारी बना दिया गया और उसे टिकट भी मिला. हालांकि चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा.
Vinod Upadhyay Encounter: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स यानी की एसटीएफ ने शुक्रवार को गोरखपुर और पूर्वांचल के चर्चित गैंगस्टर विनोद उपाध्याय को एनकाउंटर में ढेर कर दिया. करीब 7 महीने से विनोद उपाध्याय को ढूंढ रही यूपी एसटीएफ की टीम जब सुल्तानपुर में उसके ठिकाने पर पहुंची तो उसने बचने के लिए फायरिंग शुरू कर दी. इसके बाद यूपीएसटीएफ ने जवाबी कार्रवाई में उसे मार गिराया. विनोद उपाध्याय ना सिर्फ माफिया और शार्प शूटर था बल्कि वो चुनाव तक लड़ चुका था.
2007 में बीएसपी की टिकट पर लड़ा था चुनाव
2005 में पहली हत्या के बाद महज दो सालों में ही विनोद उपाध्याय ने अपना राजनीतिक रसूख भी बना लिया था और बीएसपी से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी थी. साल 2007 में बसपा ने विनोद उपाध्याय को गोरखपुर का प्रभारी बना दिया. इसके बाद उसी साल हुए विधानसभा चुनाव में गोरखपुर की ही सहजनवा सीट से बीएसपी ने विनोद उपाध्याय को उम्मीदवार भी बनाया लेकिन वो चुनाव हार गया.
35 से ज्यादा केस थे दर्ज
विनोद उपाध्याय के खिलाफ यूपी में 35 से ज्यादा आपराधिक केस दर्ज थे और बीते सात महीने से गोरखपुर क्राइम ब्रांच और एसटीएफ की टीम ढूंढ रही थी. उपाध्याय के जुर्म की दुनिया में एंट्री साल 2004 में एक हत्या से हुई थी. महज एक थप्पड़ का बदला लेने के लिए उसने पहली बार हत्या जैसे संगीन अपराध को अंजाम दिया था. वो अयोध्या का रहने वाला था.
2005 में की थी पहली हत्या

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