
ईरान युद्ध में अमेरिका-इजरायल ने अरबों फूंके, रूस की लगी लॉटरी, जानें पुतिन ने कैसे करी कमाई
ABP News
Iran Israel US War: मिडिल ईस्ट में जारी जंग ने एनर्जी उत्पादन के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र से कच्चे तेल का निर्यात बाधित कर दिया. यह रूस के लिए सबसे सबसे अधिक फायदा उठाने वाला अवसर बन गया.
मिडिल ईस्ट में जारी जंग की आग अब धीरे-धीरे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को अपने चपेट में लेने लगी है. डोनाल्ड ट्रंप जब 2025 में फिर से व्हाइट हाउस लौटे तो उन्होंने पहले दिन से रूस के एनर्जी सेक्टर को कमजोर करने की कोशिश शुरू कर दी. ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध को लेकर मॉस्को को युद्ध मशीन कहा और रूस के दो सबसे बड़े तेल के ग्राहक भारत-चीन पर दवाब बनाने शुरू कर दिए. इसी का नतीजा है कि अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगाया ताकि वह रूस से तेल खरीदना बन कर दे. हालांकि अब ट्रंप प्रशासन ने भारत को टैरिफ में राहत दी है, लेकिन रूसी एनर्जी और तेल को लेकर अपनी स्थिति साफ कर दी.
जंग के कारण यूराल क्रूड ऑयल की कीमत में उछाल
रूसी तेल को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की यह नीति कारगर भी रही, लेकिन जब से अमेरिका ने ईरान पर हमला कर युद्ध छेड़ा है तब से ट्रंप का प्लान उन्हीं पर भारी पड़ने लगा है. मिडिल ईस्ट में जारी जंग ने एनर्जी उत्पादन के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र (अरब देश) से कच्चे तेल का निर्यात बाधित कर दिया. यह रूस के लिए सबसे सबसे अधिक फायदा उठाने वाला अवसर बन गया. पिछले हफ्ते अमेरिका ने भारत को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दी. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह कदम वैश्विक बाजार में तेल की कमी न हो इसलिए उठाया गया है.
अमेरिकी वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि वैश्विक आपूर्ति बढ़ाने में मदद करने के लिए अमेरिका रूसी तेल पर यूक्रेन से संबंधित प्रतिबंधों में और ढील दे सकता है. साल 2025 से अमेरिका की ओर से रूस के खिलाफ उठाए गए सख्त कदम ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को सोचने पर मजबूर कर दिया कि वो युद्ध को जारी रखें या अपनी अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान का जोखिम उठाएं. हालांकि अब खेल पलट गया है क्योंकि जंग की वजह से ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे रूस के 'यूराल' (Urals) तेल की वैल्यू भी बढ़ गई है.













