
ईरान-इजरायल जंग से भारत की 2 बड़ी चिंताएं क्या हैं?
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ईरान की जंग को लेकर भारत में आज 2 बड़ी चिंताएं हैं. एक चिंता तो तेल और गैस की सप्लाई को लेकर है जो होर्मुज की खाड़ी के प्रभावित होने के कारण ठप पड़ी है. दूसरी चिंता अमेरिका की उस करतूत को लेकर भी है जिसमें टंप ने जंग की आग की चिनगारी हिंद महासागर तक फैलाने की कोशिश की है. क्योंकि भारत के साझा युद्धाभ्यास में शामिल होकर लौट रहे ईरानी फ्रिगेट को हिंद महासागर में छिपे अमेरिकी सबमरीन ने ध्वस्त कर दिया.

ईरान ने अयातुल्ला अली खामेनेई को सुपुर्दे खाक करने और शोक समारोह को अचानक अगले आदेश तक टाल दिया है. तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में तैयारियां जारी हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों और इजरायल की कड़ी चेतावनी के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. इजरायल के रक्षा मंत्री ने कहा है कि ईरानी शासन द्वारा चुना गया कोई भी नया नेता, जो इजरायल के खिलाफ नीति अपनाएगा, उसे निशाना बनाया जा सकता है.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी लड़ाई गुरुवार को छठे दिन में पहुंच गई है. दोनों पक्षों के लगातार हमलों के कारण इस क्षेत्र में संकट और बढ़ता दिखाई दे रहा है और हालात अभी भी शांत होने के कोई संकेत नहीं दिखा रहे हैं। इस बीच दुबई में फंसी एक्ट्रेस लारा दत्ता ने एक वीडियो शेयर किया है. देखिए.

अमेरिका-ईरान युद्ध के पांचवें दिन हिंद महासागर में श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो हमले से ईरानी युद्धपोत आईरिस को डुबो दिया. इस हमले में 80 लोगों की मौत हो गई। यह युद्धपोत विशाखापट्टनम फ्लीट रिव्यू से लौट रहा था और अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में था. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेट ने बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार टॉरपीडो से दुश्मन का जहाज डुबोया गया है. अमेरिका ने ईरान की 20 नौसैनिक जहाज और एक पनडुब्बी को नष्ट कर दिया है.

ईरानी हमलों के बीच यूएई ने 172 बैलिस्टिक मिसाइल और आठ क्रूज मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने का दावा किया है. यूएई के मुताबिक कुल लगभग 750 ड्रोन भी इंटरसेप्ट किए गए हैं. रूस और चीन समर्थन तो दे रहे हैं, लेकिन सैनिक या एयर डिफेंस सिस्टम की खुली मदद नहीं कर रहे हैं. ईरान की सैन्य तैयारी और हमलों की संख्या देखकर यह साफ है कि युद्ध की स्थिति गंभीर है और खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है.

ईरान पर संयुक्त सैन्य अभियान के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की करीबी साझेदारी अब परीक्षा में है. शुरुआती लक्ष्य शासन परिवर्तन बताया गया था, लेकिन हालिया बयानों से प्राथमिकताएं बदलती दिख रही हैं. अमेरिका में घरेलू दबाव, बढ़ती गैस कीमतें और चुनावी राजनीति इस युद्ध की दिशा तय कर सकती हैं.








