
ग्रेविटी बम क्या है, जिससे ईरान पर हमले की धमकी दे रहा अमेरिका?
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पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ ने ईरान के खिलाफ जारी जंग को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाया है. उन्होंने दावा किया है कि अमेरिका यह जंग जीत रहा है और जल्द ही ईरान के हवाई क्षेत्र पर अमेरिका और इजरायल का फुल कंट्रोल होगा.
ईरान जंग के बीच पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ ने ऐलान किया है कि मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना की और कुमुक (अतिरिक्त बल) पहुंच रही है. उन्होंने कहा कि अमेरिका, ईरान में जीत हासिल कर रहा है और दुश्मन की स्थिति अब पूरी तरह खत्म होने जैसी हो गई है. हेगसेथ के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल अगले एक हफ्ते से भी कम वक्त में ईरान के आसमान पर पूरी तरह कंट्रोल कर लेंगे.
उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान पर तब प्रहार कर रही है, जब वह पहले से ही कमजोर स्थिति में है.
हेगसेथ ने कहा, "यूएस का सैन्य अभियान अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में हमलों की कई और लहरें देखने को मिलेंगी. अमेरिका इस मिशन के लिए अपने 'प्रिसिजन ग्रेविटी बमों' के असीमित भंडार का उपयोग करने के लिए तैयार है."
ग्रेविटी न्यूक्लियर बम अब तक बने सबसे खतरनाक हथियारों में से एक है. इस तरह के बमों को फ्री-फॉल न्यूक्लियर बम भी कहा जाता है. ये एयरक्राफ्ट से गिराए जाने वाले टैक्टिकल अनगाइडेड हथियार होते हैं. मिसाइलों के उलट, ये बम डिलीवरी के लिए पूरी तरह से ग्रेविटी और एयरक्राफ्ट की स्पीड पर निर्भर करते हैं. एक बार छोड़े जाने के बाद, ये सिर्फ़ ग्रेविटी फोर्स के तहत टारगेट की ओर गिरते हैं. सबसे पहले शुरुआती न्यूक्लियर युग में डेवलप हुए, ये बहुत एडवांस्ड थर्मोन्यूक्लियर डिवाइस बन गए हैं.
ज़्यादातर ग्रेविटी न्यूक्लियर बम थर्मोन्यूक्लियर होते हैं, जिसका मतलब है कि वे बहुत ज़्यादा एक्सप्लोसिव पावर बनाने के लिए फिशन और फ्यूजन दोनों का इस्तेमाल करते हैं. फ्यूजन रिएक्शन एटॉमिक न्यूक्लिआई को मिलाकर बहुत ज़्यादा एनर्जी रिलीज़ करते हैं, जबकि फिशन भारी एटम को तोड़ता है. यह कॉम्बिनेशन थर्मोन्यूक्लियर हथियारों को पहले के एटॉमिक बमों की तुलना में काफ़ी ज़्यादा खतरनाक बनाता है.
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मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी लड़ाई गुरुवार को छठे दिन में पहुंच गई है. दोनों पक्षों के लगातार हमलों के कारण इस क्षेत्र में संकट और बढ़ता दिखाई दे रहा है और हालात अभी भी शांत होने के कोई संकेत नहीं दिखा रहे हैं। इस बीच दुबई में फंसी एक्ट्रेस लारा दत्ता ने एक वीडियो शेयर किया है. देखिए.

अमेरिका-ईरान युद्ध के पांचवें दिन हिंद महासागर में श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो हमले से ईरानी युद्धपोत आईरिस को डुबो दिया. इस हमले में 80 लोगों की मौत हो गई। यह युद्धपोत विशाखापट्टनम फ्लीट रिव्यू से लौट रहा था और अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में था. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेट ने बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार टॉरपीडो से दुश्मन का जहाज डुबोया गया है. अमेरिका ने ईरान की 20 नौसैनिक जहाज और एक पनडुब्बी को नष्ट कर दिया है.

ईरानी हमलों के बीच यूएई ने 172 बैलिस्टिक मिसाइल और आठ क्रूज मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने का दावा किया है. यूएई के मुताबिक कुल लगभग 750 ड्रोन भी इंटरसेप्ट किए गए हैं. रूस और चीन समर्थन तो दे रहे हैं, लेकिन सैनिक या एयर डिफेंस सिस्टम की खुली मदद नहीं कर रहे हैं. ईरान की सैन्य तैयारी और हमलों की संख्या देखकर यह साफ है कि युद्ध की स्थिति गंभीर है और खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है.

ईरान पर संयुक्त सैन्य अभियान के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की करीबी साझेदारी अब परीक्षा में है. शुरुआती लक्ष्य शासन परिवर्तन बताया गया था, लेकिन हालिया बयानों से प्राथमिकताएं बदलती दिख रही हैं. अमेरिका में घरेलू दबाव, बढ़ती गैस कीमतें और चुनावी राजनीति इस युद्ध की दिशा तय कर सकती हैं.

सऊदी अरब के अल खज इलाके में ईरान की दो क्रूज मिसाइलों को सऊदी रक्षा मंत्रालय द्वारा नष्ट कर दिया गया है. ये मिसाइल अटैक इस क्षेत्र में जारी संघर्ष में इजरायल व अमेरिका द्वारा ईरान को निशाना बनाए जाने के बीच हुआ है. ईरान ने खाड़ी के कई देशों पर वार जारी रखे हैं जहां मिसाइलों व ड्रोन हमलों की तीव्रता बढ़ी है. अमेरिका और उसके सहयोगी इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए तैनात हैं लेकिन ईरान की रणनीति और प्रॉक्सीज की सक्रियता को रोकना चुनौती बना हुआ है.

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