
पाकिस्तान का दोस्त, खालिस्तान का नया बेस... अजरबैजान की पूरी कहानी जहां ईरान ने किया ड्रोन अटैक
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मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब तुर्की और अजरबैजान तक फैल चुका है, जहां ईरान ने नख़चिवान पर ड्रोन हमला किया. इस हमले में दो नागरिक घायल हुए हैं. अजरबैजान में ये हमला भारत में अलग निगाहों से क्यों देखा जा रहा है?
मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब कई देशों में फैल चुकी है. इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच हुआ संघर्ष बुधवार-गुरुवार को तुर्की और अजरबैजान तक फैल गया. अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि ईरान ने उसके अलग-थलग पड़े क्षेत्र नख़चिवान पर ड्रोन हमला किया. मंत्रालय के बयान के अनुसार एक ड्रोन नख़चिवान एयरपोर्ट के पास गिरा, जबकि दूसरा एक स्कूल के नजदीक दुर्घटनाग्रस्त हुआ. मंत्रालय ने बताया कि इस घटना में दो नागरिक घायल हो गए.
क्यों चर्चा का विषय बना अजरबैजान पर हमला? बता दें कि अजरबैजान, तुर्की के नक्शेकदम पर पाकिस्तान का खैरख्वाह रहा है. वह उसके साथ अपना 'दोस्ताना' निभाता रहा है. ऑपरेशन सिंदूर में भी अजरबैजान ने पाकिस्तान को सपोर्ट किया था और सहानुभूति भी जताई थी. इसलिए जब अजरबैजान ने ये कहा कि उसके ऊपर भी ईरान ने हमला किया है तो अचानक ही वह भारत के लिए अलग से चर्चा का विषय बन गया.
असल में अजरबैजान की करीबी बीते कुछ समय में पाकिस्तान से बढ़ी हैं. पाकिस्तान भी अजरबैजान का इस्तेमाल भारत के विरोध के लिए करता रहा है
खालिस्तानी साजिश का नया बेस अजरबैजान! इसी साल जनवरी में अजरबैजान ने ग्लोबल खालिस्तानी कॉन्फ्रेंस की मेजबानी की थी. इस कथित कॉन्फ्रेंस में भारत में सिखों के साथ अत्याचार पर बहस की गई और खालिस्तान के विचार को वैधता देने की कोशिश की गई थी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, खालिस्तानी तत्वों की कनाडा, यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में उपस्थिति पहले ही भारत की चिंता बढ़ाता रहा है. पाकिस्तानी प्रतिनिधि हुए थे कार्यक्रम में शामिल राजधानी बाकू में 16 जनवरी को सरकार से जुड़े इनिशिएटिव ग्रुप ने भारत में अल्पसंख्यक समुदायों के साथ व्यवहार पर अपना पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन किया था. 'भारत में सिखों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ नस्लवाद और हिंसा: जमीनी हकीकत' नाम के इस कार्यक्रम में पाकिस्तानी पंजाब के अल्पसंख्यक मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा के साथ कनाडा, यूके और अमेरिका के प्रतिनिधि शामिल हुए. जिससे साफ दिखा कि इसके पीछे सरकारी समर्थन है.ऑपरेशन सिंदूर में किया था भारत का विरोध, पाकिस्तान का समर्थन ऑपरेशन सिंदूर में अजरबैजान ने पाकिस्तान का खैरख्वाह बनते हुए उसके प्रति सहानुभूति जताई थी. पाकिस्तान में अजरबैजान के राजदूत खजर फरहादोव ने कहा था कि उनका देश संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुसार कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का खुलकर समर्थन करता है. रिपब्लिक ऑफ अजरबैजान की स्वतंत्रता की 30वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए फरहादोव ने कहा कि 'अजरबैजान यूएन के प्रस्तावों के अनुसार कश्मीर मुद्दे पर पूरी तरह से पाकिस्तान के साथ है. पाकिस्तान और अजरबैजान के बीच ब्रिज है तुर्की तुर्की खुलकर पाकिस्तान का सपोर्ट करता रहा है और अजरबैजान के लिए वह एक ब्रिज की तरह है. दोनों देशों की विदेश नीति में, वन नेशन-टू स्टेट की बात होती है. भाषा, कल्चर और खानपान में भी दोनों लगभग एक से हैं.
कोविड में पाकिस्तान के करीब आया था अजरबैजान पाकिस्तान का अजरबैजान से जुड़ाव कोविड के दौर में हुआ, जब साल 2020 में अजरबैजान ने आर्मेनिया के खिलाफ युद्ध छेड़ा. इस्लामाबाद तब खुलकर अजरबैजान के पक्ष में आ गया. यहां तक कि उसे सैन्य सपोर्ट देने तक के वादे करने लगा. इससे दोनों देशों का आपस में जुड़ाव गहरा हुआ था.
कैसा है अजरबैजान, क्या है विचारधारा? अज़रबैजान वैसे तो एक सेक्युलर देश है, जहां धर्म और राजनीति अलग-अलग हैं, हालांकि अधिकांश जनसंख्या शिया इस्लाम को मानती है. यह देश ऐतिहासिक रूप से फारसी, ओटोमन और सोवियत संस्कृतियों का एक अनूठा मिला-जुला असर सामने रखता है. हालांकि मुख्य रूप से तुर्की की विरासत को महत्व देता है. इसके पश्चिम में आर्मेनिया, छोटे से हिस्से से मिलता हुआ तुर्की और दक्षिण में ईरान है. इसलिए ईरान का अजरबैजान पर हमला करना और भी अधिक चौंकाता है.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी लड़ाई गुरुवार को छठे दिन में पहुंच गई है. दोनों पक्षों के लगातार हमलों के कारण इस क्षेत्र में संकट और बढ़ता दिखाई दे रहा है और हालात अभी भी शांत होने के कोई संकेत नहीं दिखा रहे हैं। इस बीच दुबई में फंसी एक्ट्रेस लारा दत्ता ने एक वीडियो शेयर किया है. देखिए.

अमेरिका-ईरान युद्ध के पांचवें दिन हिंद महासागर में श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो हमले से ईरानी युद्धपोत आईरिस को डुबो दिया. इस हमले में 80 लोगों की मौत हो गई। यह युद्धपोत विशाखापट्टनम फ्लीट रिव्यू से लौट रहा था और अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में था. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेट ने बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार टॉरपीडो से दुश्मन का जहाज डुबोया गया है. अमेरिका ने ईरान की 20 नौसैनिक जहाज और एक पनडुब्बी को नष्ट कर दिया है.

ईरानी हमलों के बीच यूएई ने 172 बैलिस्टिक मिसाइल और आठ क्रूज मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने का दावा किया है. यूएई के मुताबिक कुल लगभग 750 ड्रोन भी इंटरसेप्ट किए गए हैं. रूस और चीन समर्थन तो दे रहे हैं, लेकिन सैनिक या एयर डिफेंस सिस्टम की खुली मदद नहीं कर रहे हैं. ईरान की सैन्य तैयारी और हमलों की संख्या देखकर यह साफ है कि युद्ध की स्थिति गंभीर है और खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है.

ईरान पर संयुक्त सैन्य अभियान के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की करीबी साझेदारी अब परीक्षा में है. शुरुआती लक्ष्य शासन परिवर्तन बताया गया था, लेकिन हालिया बयानों से प्राथमिकताएं बदलती दिख रही हैं. अमेरिका में घरेलू दबाव, बढ़ती गैस कीमतें और चुनावी राजनीति इस युद्ध की दिशा तय कर सकती हैं.

सऊदी अरब के अल खज इलाके में ईरान की दो क्रूज मिसाइलों को सऊदी रक्षा मंत्रालय द्वारा नष्ट कर दिया गया है. ये मिसाइल अटैक इस क्षेत्र में जारी संघर्ष में इजरायल व अमेरिका द्वारा ईरान को निशाना बनाए जाने के बीच हुआ है. ईरान ने खाड़ी के कई देशों पर वार जारी रखे हैं जहां मिसाइलों व ड्रोन हमलों की तीव्रता बढ़ी है. अमेरिका और उसके सहयोगी इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए तैनात हैं लेकिन ईरान की रणनीति और प्रॉक्सीज की सक्रियता को रोकना चुनौती बना हुआ है.

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