
इबोला वायरस पांच साल तक इंसानी शरीर में छिपा रहा, अब फैला रहा नया संक्रमण
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इबोला अभी अफ्रीकी देशों से खत्म नहीं हुआ है. 2014 के पांच साल बाद अचानक फिर साल 2019 में इसका नया आउटब्रेक शुरू हो गया. वैज्ञानिकों का मानना है कि वायरस 2014 से 2016 तक लोगों को बीमार करने के बाद कुछ ऐसे इंसानों के शरीर में निष्क्रिय होकर छिप गया. बाद में जब उपयुक्त माहौल मिला तो वह फिर अपना संक्रमण फैलाने लगा. अब यही संक्रमण पश्चिमी अफ्रीकी देश गिनी में फैल रहा है.
इबोला महामारी अभी अफ्रीकी देशों से खत्म नहीं हुई है. 2014 के पांच साल बाद अचानक फिर साल 2019 में इसका नया आउटब्रेक शुरू हो गया. वैज्ञानिकों का मानना है कि वायरस 2014 से 2016 तक लोगों को बीमार करने के बाद कुछ ऐसे इंसानों के शरीर में निष्क्रिय होकर छिप गया. बाद में जब उपयुक्त माहौल मिला तो वह फिर अपना संक्रमण फैलाने लगा. अब यही संक्रमण पश्चिमी अफ्रीकी देश गिनी में फैल रहा है. (फोटोःगेटी) वैज्ञानिक ये बात पहले से जानते थे कि इबोला वायरस किसी के शरीर में छिपा हो सकता है. खासकर शरीर के उन भागों में जहां प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है जैसे कि आंख, अंडकोष आदि. इसका मतलब ये है कि व्यक्ति घातक संक्रमण से उबरने के बाद भी कुछ समय तक वायरस का प्रसार कर सकता है. दुर्लभ स्थिति में ये किसी दूसरे व्यक्ति को भी संक्रमित कर सकता है. अब तक इबोला वायरस का सबसे लंबा संक्रमण 500 दिनों बाद देखा गया है. (फोटोःगेटी) एक नए विश्लेषण से पता चला है कि इबोला वायरस न केवल लंबे समय तक छिप सकता है बल्कि इसमें नए संक्रमण को फैलाने की भी क्षमता होती है. गिनी (Guinea) में हाल ही में हुए इबोला आउटब्रेक में 18 लोग संक्रमित हुए. 9 लोगों की जान चली गई. गिनी के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में संक्रमण के 3 नमूनों को वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन की लैबोरेटरी में जांच के लिए भेजा है. (फोटोःगेटी)
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