
इजरायल का एकलौता अरब दोस्त भी छोड़ रहा साथ? पहले राजदूत निकाला, अब उठाया ये कदम
AajTak
इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच साल 2020 में आधिकारिक रिश्ते स्थापित हुए थे. इसके बाद से दोनों देशों के रिश्तों में मजबूती आई है. लेकिन हाल में कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं जिससे लग रहा है कि दोनों देशों के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है.
अरब देशों और इजरायल के बीच ऐतिहासिक रूप से शत्रुता रही है जो 1967 के छह दिवसीय युद्ध के बाद से और गहरी होती चली गई. युद्ध में इजरायल के खिलाफ सभी अरब देश साथ आ गए थे, बावजूद इसके इजरायल ने जीत हासिल की. दशकों बाद अमेरिका की पहल से कुछ अरब देशों और इजरायल के संबंधों में कटुता कम आई और यूएई इजरायल के लिए अरब दुनिया का दरवाजा बना. साल 2020 में अमेरिकी पहल से यूएई और इजरायल के बीच 'अब्राहम अकॉर्ड' पर हस्ताक्षर हुआ जिसके बाद दोनों देशों ने अपने संबंधों को सामान्य किया.
अब्राहम समझौते में केवल यूएई ही शामिल नहीं था बल्कि मोरक्को, सूडान और बहरीन ने भी इजरायल के साथ राजनयिक संबंधों को शुरुआत की. समझौते के बाद से इजरायल और यूएई के संबंध काफी आगे बढ़े हैं और यह केवल सरकार से सरकार तक सीमित नहीं रहा बल्कि रिश्ता दोनों देशों के लोगों के बीच भी बढ़ा है. यूएई की एक रिपोर्ट में बताया गया कि साल 2021 में इजरायल से यूएई पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या 97 हजार से ज्यादा था. और अगले साल यानी 2022 में यह संख्या 2021 के बहाने 157 फीसदी बढ़ गई.
दोनों देशों के बीच व्यापार में भी भारी बढ़ोतरी आई है. डेटा एनालिटिक्स फर्म CEIC के आंकड़े के मुताबिक, मार्च 2025 में इजरायल ने यूएई को 6.6 करोड़ डॉलर का निर्यात किया था. वहीं, यूएई ने इजरायल को 94 करोड़ का निर्यात किया था. इजरायल में यूएई के हीरों की भारी मांग है और यह निर्यात का अहम हिस्सा है.
बढ़ते संबंधों के बीच हाल में कुछ घटनाएं ऐसी हुई हैं जिससे दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव बढ़ता दिख रहा है.
इसी हफ्ते इजरायल के चैनल 12 News की एक रिपोर्ट में कहा गया कि यूएई ने इजरायल के राजदूत योसी शेली को देश से निष्कासित कर दिया है. रिपोर्ट में बताया गया, 'यूएई ने कहा कि अब वो येसी को राजदूत के रूप में नहीं चाहता. इसके बाद इजरायली सरकार को राजदूत को वापस बुलाने के लिए मजबूर होना पड़ा है.'
वहीं, हिब्रू मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि राजदूत ने यूएई के एक बार में ऐसी हरकत की थी कि जिससे यूएई की 'गरिमा' को नुकसान पहुंचा.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

इस वीडियो में जानिए कि दुनिया में अमेरिकी डॉलर को लेकर कौन सा नया आर्थिक परिवर्तन होने वाला है और इसका आपके सोने-चांदी के निवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा. डॉलर की स्थिति में बदलाव ने वैश्विक बाजारों को हमेशा प्रभावित किया है और इससे निवेशकों की आर्थिक समझ पर भी असर पड़ता है. इस खास रिपोर्ट में आपको विस्तार से बताया गया है कि इस नए भूचाल के कारण सोने और चांदी के दामों में क्या संभावित बदलाव आ सकते हैं तथा इससे आपके निवेश को कैसे लाभ या हानि हो सकती है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिटेन के पीएम की मेजबानी करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून तभी सच में असरदार हो सकता है जब सभी देश इसका पालन करें. राष्ट्रपति शी ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि अगर बड़े देश ऐसा करेंगे नहीं तो दुनिया में जंगल का कानून चलेगा. विश्व व्यवस्था जंगल राज में चली जाएगी.

ईरान की धमकियों के जवाब में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने कई सहयोगियों के साथ सबसे बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है. यह युद्धाभ्यास US एयर फोर्सेज सेंट्रल (AFCENT) द्वारा आयोजित किया गया है, जो कई दिनों तक चलेगा. इस युद्धाभ्यास की घोषणा 27 जनवरी को हुई थी और यह अभी भी जारी है. माना जा रहा है कि यह अभ्यास अगले दो से तीन दिनों तक चलेगा. इस प्रयास का मकसद क्षेत्र में तनाव के बीच सैन्य तैयारियों को बढ़ाना और सहयोगियों के साथ सामरिक तालमेल को मजबूत करना है.

कोलंबिया और वेनेज़ुएला की सीमा के पास एक जेट विमान अचानक लापता हो गया. यह विमान फ्लाइट नंबर NSE 8849 थी जो कुकुटा से ओकाना की ओर जा रही थी. इस विमान ने सुबह 11 बजकर 42 मिनट पर उड़ान भरी थी लेकिन लैंडिंग से पहले ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया. राडार से इस विमान का अचानक गायब होना चिंता का विषय है.

वेनेजुएला में मिली बड़ी कामयाबी के बाद अब डॉनल्ड ट्रंप का आत्मविश्वास आसमान छू रहा है। कूटनीति के गलियारों में चर्चा है कि ट्रंप के मुंह 'खून लग गया है' और अब उनकी नज़रें क्यूबा और ईरान पर टिक गई हैं... और अब वो कह रहे हैं- ये दिल मांगे मोर...। ट्रंप की रणनीति अब सिर्फ दबाव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सीधे सत्ता परिवर्तन के खेल में उतर चुके हैं। क्या क्यूबा और ईरान ट्रंप की इस 'मोमेंटम' वाली कूटनीति का मुकाबला कर पाएंगे?







