इंसानों के बाद अब हिरणों को शिकार बना रहा कोरोना! इस देश में 40 फीसदी संक्रमित
AajTak
अध्ययन में उपयोग किए गए 5,700 नमूने 2020-22 से न्यूयॉर्क में दो वर्षों में एकत्र किए गए थे. अमेरिका में अनुमानित 3 करोड़ सफेद पूंछ वाले हिरण हैं. रिसर्च में कहा गया है कि 2022 के एक अध्ययन में पाया गया कि 2021 में पांच राज्यों में सफेद पूंछ वाले हिरणों की आबादी में कुल 40 प्रतिशत तक SARS-CoV-2 से संक्रमित थे.
कोरोना संक्रमण ने अभी भी दुनिया की चिंता बढ़ाई हुई है. चीन का बुरा हाल है. इसके अलावा कई अन्य देशों में भी लगातार कोरोना लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है. इस बीच उत्तरी अमेरिका में बड़ी संख्या में पाए जाने वाले सफेद पूंछ वाले हिरण में कोरोना का SARS-COV2 वेरिएंट पाया गया है. जिससे वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है. हालांकि ये वेरिएंट एक समय तक लोगों में भी पाया जाता था, लेकिन लंबे समय से इस तरह के कोई मामले मनुष्य में नहीं मिले हैं. दरअसल, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, यूएस के शोधकर्ताओं ने सफेद पूंछ वाले हिरणों के सैंपल लिए थे. इनका रिसर्च जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित हुआ है. अध्ययन में उपयोग किए गए 5,700 नमूने 2020-22 के बीच दो वर्षों में एकत्र किए गए थे. अमेरिका में अनुमानित 3 करोड़ सफेद पूंछ वाले हिरण हैं. रिसर्च में कहा गया है कि 2022 के एक अध्ययन में पाया गया कि 2021 में पांच राज्यों में सफेद पूंछ वाले हिरणों की आबादी में कुल 40 प्रतिशत तक SARS-CoV-2 से संक्रमित थी. कॉर्नेल के एसोसिएट प्रोफेसर डिएगो डायल ने बताया, "इस अध्ययन का मकसद इस जंगली जानवर की आबादी में अल्फा, गामा और डेल्टा के वेरिएंटों का पता लगाना था. अध्ययन में कहा गया है कि महामारी के दौरान, हिरण मनुष्यों के संपर्क में आने से, संभवतः शिकार, वन्यजीव पुनर्वास, जंगली जानवरों को खिलाने या अपशिष्ट जल या जल स्रोतों के माध्यम से सार्स-सीओवी-2 से संक्रमित हो गए हैं.
हिरणों में नहीं मिला अल्फा या गामा वेरिएंट
जब शोधकर्ताओं ने न्यूयॉर्क में मनुष्यों से लिए गए समान वेरिएंट के अनुक्रमों के साथ हिरण में पाए जाने वाले वेरिएंट के जीनोमिक अनुक्रमों की तुलना की, तो उन्होंने पाया कि वायरस का हिरण में म्यूटेशन हो गया था. अध्ययन में कहा गया है कि हिरण में अल्फा और गामा वेरिएंट नहीं मिला है. म्यूटेशन से पता चलता है कि वायरस हिरण के लिए अनुकूलित हो गया है, संभवतः यह बहुत तादात में फैला होगा.
संक्रमित जानवरों की निगरानी करना जरूरी
अध्ययन में कहा गया है कि यह पुष्टि करने के लिए और अध्ययन की आवश्यकता है कि क्या ये वेरिएंट समय के साथ हिरणों में गायब हो जाएंगे या SARS-CoV-2 का शिकारियों सहित अन्य वन्यजीवों में फैलने का खतरा है या नहीं. डायल ने कहा, "हमारे अध्ययन में प्राप्त सबूतों के कारण, इन जानवरों की आबादी में वायरस की निगरानी करना जारी रखना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि वास्तव में उन म्यूटेंट को समझा जा सके और उन परिवर्तनों को ट्रैक किया जा सके जो मनुष्यों और अन्य वन्यजीवों में वापस फैल सकते हैं."

अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में हाल में एक संघीय अधिकारी की गोली से नर्स एलेक्स जेफ्री प्रेटी की मौत हो गई थी. जिसके बाद से अमेरिका में पुलिस और फेडरल एजेंसियों की कार्रवाई, विरोध-प्रदर्शनों में जाने वालों और आम नागरिकों की जान की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. इस बीच वॉशिंगटन में प्रेटी की याद में लोगों ने कैंडल मार्च निकाला. देखें अमेरिका से जुड़ी 10 बड़ी खबरें.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

इस वीडियो में जानिए कि दुनिया में अमेरिकी डॉलर को लेकर कौन सा नया आर्थिक परिवर्तन होने वाला है और इसका आपके सोने-चांदी के निवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा. डॉलर की स्थिति में बदलाव ने वैश्विक बाजारों को हमेशा प्रभावित किया है और इससे निवेशकों की आर्थिक समझ पर भी असर पड़ता है. इस खास रिपोर्ट में आपको विस्तार से बताया गया है कि इस नए भूचाल के कारण सोने और चांदी के दामों में क्या संभावित बदलाव आ सकते हैं तथा इससे आपके निवेश को कैसे लाभ या हानि हो सकती है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिटेन के पीएम की मेजबानी करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून तभी सच में असरदार हो सकता है जब सभी देश इसका पालन करें. राष्ट्रपति शी ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि अगर बड़े देश ऐसा करेंगे नहीं तो दुनिया में जंगल का कानून चलेगा. विश्व व्यवस्था जंगल राज में चली जाएगी.

ईरान की धमकियों के जवाब में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने कई सहयोगियों के साथ सबसे बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है. यह युद्धाभ्यास US एयर फोर्सेज सेंट्रल (AFCENT) द्वारा आयोजित किया गया है, जो कई दिनों तक चलेगा. इस युद्धाभ्यास की घोषणा 27 जनवरी को हुई थी और यह अभी भी जारी है. माना जा रहा है कि यह अभ्यास अगले दो से तीन दिनों तक चलेगा. इस प्रयास का मकसद क्षेत्र में तनाव के बीच सैन्य तैयारियों को बढ़ाना और सहयोगियों के साथ सामरिक तालमेल को मजबूत करना है.








