
'आफताब की थी प्रॉपर्टी पर नजर, मेरी बेटी का ब्रेनवॉश किया', श्रद्धा के पिता का Exclusive इंटरव्यू
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आजतक के शो ब्लैक एंड व्हाइट में आज श्रद्धा वॉल्कर के पिता विकास वॉल्कर ने अपना दर्द सुनाया. उन्होंने कार्यक्रम में बातचीत के दौरान कहा कि ये वक्त एक बुरे सपने के कम नहीं है. विकास वॉल्कर ने आफताब की परवरिश पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि मुझे तो लगता है कि आफताब ने प्लानिंग के तहत मेरी बेटी को निशाना बनाया.
देशभर में श्रद्धा वॉल्कर के मर्डर के बाद सबकी इच्छा है कि मृतका को न्याय मिले. इस मुद्दे पर न्याय की गुहार पूरा देश तो लगा ही रहा है लेकिन परिवार के लोगों को अधिक संघर्ष करना पड़ रहा है. श्रद्धा के पिता विकास वॉल्कर ने आजतक के ब्लैक एंड वाइट शो में गुरुवार को इस मर्डर केस को लेकर बात की. विकास वॉल्कर ने आफताब की परवरिश पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि मुझे तो लगता है कि आफताब ने प्लानिंग के तहत मेरी बेटी को निशाना बनाया. श्रद्धा के पिता के लिए ये वक्त एक बुरे सपने के कम नहीं है.
विकास वॉल्कर ने कहा कि मैं इतने बड़े दुख को झेल रहा हूं जिसकी कल्पना मैंने कभी नहीं की. विकास वॉल्कर ने आफताब के लिए फांसी की मांग की. उन्होंने कहा कि आरोपी को कम से कम फांसी तो होनी ही चाहिए. श्रद्धा के पिता ने कहा कि शुरुआत में तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि मेरी बेटी के साथ ऐसा हो सकता है. DNA सैंपल मैच होने के बाद मुझे इस बात पर यकीन हुआ, उससे पहले मुझमें एक आस जिंदा थी कि मेरी बेटी कभी लौट आएगी.
बातचीत के दौरान जब श्रद्धा के पिता से पूछा गया कि वे अपनी बेटी को बचाने के लिए क्या करते? इसपर विकास वॉल्कर ने कहा कि मुझे उम्मीद थी कि कभी तो वो वापस आएगी. मेरी बेटी ने जो तकलीफ उठाई उसका मुझे अंदाजा तक नहीं था. वसई पुलिस में 2020 में जब उसने शिकायत की तो मुझे पता तक नहीं चला. अगर मुझे उस वक्त पता चलता को मेरी कोशिश रहती कि उसे घर पर लाऊं.
'दिल्ली वाले फ्लैट में मेरे लिए खड़ा हो पाना भी मुश्किल था'
श्रद्धा के पिता से जब पूछा गया कि क्या आपने वो जगह देखी है, जहां आपकी बेटी के साथ ये जुर्म हुआ. इसके जवाब में विकास वॉल्कर ने कहा कि पुलिस मुझे दिल्ली के उस फ्लैट में लेकर गई तो मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. मुझपर उस फ्लैट में खड़ा नहीं हुआ जा रहा था. वो शख्स (आफताब) पूरी घटना को बता रहा था और मुझे अजीब सा महसूस हुआ और मैं तुरंत उस फ्लैट से बाहर आ गया. फिर पुलिस मुझे जंगल लेकर गई और मुझे तब तक इस बात पर यकीन नहीं हो पा रहा था. मुझे उम्मीद थी कि ये मेरी बेटी नहीं हो सकती.
'मुझे पछतावा है लेकिन आफताब को नहीं'

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