
'आप मेरी तरह एक हिंदू...', उपचुनाव में पार्टी की हार के बाद ऋषि सुनक ने जनता से की ये अपील
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ब्रिटेन में हुए रोडशेल उपचुनाव का रिजल्ट आने के बाद 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर जनता को संबोधित करते हुए ऋषि सुनक ने जनता से लोकतंत्र बचाने की अपील करते हुए कहा कि मैं यहां हमारे देश के पहले अश्वेत प्रधानमंत्री के रूप में खड़ा हूं, जो हमारे देश के इतिहास में सबको साथ लेकर चलने वाली सरकार का नेतृत्व कर रहा है.
ब्रिटेन (Britain) के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (Rishi Sunak) ने शुक्रवार शाम को देश के नागरिकों से लोकतंत्र को बचाने के लिए अपील की. उन्होंने चेतावनी दी कि चरमपंथी ताकतें देश को तोड़ने और इसकी बहु-धार्मिक पहचान को कमजोर करने के लिए तैयार रहती हैं. अपनी हिंदू मान्यताओं का जिक्र करते हुए, ब्रिटिश भारतीय नेता ने जोर देकर कहा कि यूनाइटेड किंगडम के स्थायी मूल्य सभी धर्मों और जातियों के प्रवासियों को गले लगाना सिखाते हैं. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को चरमपंथी ताकतों द्वारा अपहरण न किया जाए.
ऋषि सुनक ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर अपनी स्पीच में कहा कि जो अप्रवासी यहां आए हैं, उन्होंने योगदान दिया है, हमारे देश की स्टोरी में नए चैप्टर लिखने में मदद की है.
'देश के अंदर कुछ ताकतें...' पीएम सुनक ने कहा कि आप मेरी तरह एक हिंदू और एक गौरवान्वित ब्रिटिश व्यक्ति हो सकते हैं, एक धर्मनिष्ठ मुस्लिम और एक देशभक्त नागरिक हो सकते हैं, जैसा कि बहुत से लोग हैं या एक लगन से काम करने वाले यहूदी व्यक्ति और अपने स्थानीय समुदाय का केंद्र हो सकते हैं और यह सब हमारे ईसाई चर्च की सहिष्णुता पर आधारित है. लेकिन मुझे डर है कि दुनिया के सबसे सफल एक से ज्यादा जाति और आस्था वाले लोकतंत्र के निर्माण में हमारी उपलब्धि को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है. देश के अंदर कुछ ताकतें हैं, जो हमें तोड़ने की कोशिश कर रही हैं.'
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ऋषि सुनक, रोशडेल उपचुनाव (Rochdale byelection) में फिलिस्तीन समर्थक जॉर्ज गैलोवे (George Galloway) की जीत के बाद यह स्पीच दे रहे थे. उन्होंने कहा कि हाल ही में कई मौकों पर, ब्रिटेन की सड़कों पर छोटे समूहों ने कब्जा कर लिया है, जो ब्रिटिश मूल्यों के दुश्मन हैं और इसकी लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान नहीं करते हैं.
'पहला अश्वेत प्रधानमंत्री...' ऋषि सुनक ने कहा कि इस्लामिक चरमपंथी और धुर दक्षिणपंथी एक-दूसरे को बढ़ावा देते हैं. वे यह दिखावा करने के लिए परेशान हैं कि उनकी हिंसा किसी तरह उचित है, जबकि वास्तव में ये ग्रुप एक ही चरमपंथी सिक्के के दो पहलू हैं...दोनों ही हमारे बहुलवादी, आधुनिक देश से नफरत करते हैं.

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