
अरुण खेत्रपालः 21 साल का लड़का जो पाकिस्तान से लड़ने छड़ी लेकर गया और परमवीर बन गया
Zee News
14 दिसंबर 1950 को पुणे में एक सैनिक के घर पैदा हुए अरुण खेत्रपाल उस वक्त महज 21 साल के थे और सेना के गुण और बारीकियां सीख रहे थे जब 1971 की भयंकर लड़ाई भारत और पाकिस्तान में छिड़ गई.
नई दिल्लीः 21 साल का एक लड़का जिसने युद्द की सारी बारीकियां भी नहीं सीखी थी लेकिन अपने अफसरों से लड़कर उसने युद्ध में जाने की बात मनवाई. वो लड़का जिसके साहस को देखकर पाकिस्तानी अफसर भी सैल्यूट करने लगे थे. वो लड़का जिसने अपनी आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ी और फिर परमवीर बन गया. ये कहानी है अरुण खेत्रपाल की. ये कहानी दो मायनों में काफी अहम है. क्योंकि आज ही के दिन यानी कि 16 दिसंबर 1971 को भारत ने पाकिस्तान को धूल चटाकर बांग्लादेश को जीत दिलाई थी. लेकिन इसी दिन भारत ने अपने इस सपूत को भी खो दिया था. आइए जानते हैं अरुण खेत्रपाल की वीरता के किस्से...
जब छिड़ी लड़ाई तो उमड़ने लगा उत्साह 14 दिसंबर 1950 को पुणे में एक सैनिक के घर पैदा हुए अरुण खेत्रपाल उस वक्त महज 21 साल के थे और सेना के गुण और बारीकियां सीख रहे थे जब 1971 की भयंकर लड़ाई भारत और पाकिस्तान में छिड़ गई. सभी यंग ऑफिसर्स को बुला लिया गया. अरुण को लगा कि वो मौका अब आ गया है जब उसे देश के लिए लड़ने का मौका मिलेगा. लेकिन जब अधिकारियों की नजर इस 21 साल के लड़के पर पड़ी तो उन्होंने अरुण को युद्ध पर जाने से मना कर दिया.

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