
अब मदरसों में भी पढ़ाई जाएगी संस्कृत, इस राज्य के वक्फ बोर्ड ने किया ऐलान, 6 साल पहले उठी थी मांग
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मदरसा वेलफेयर सोसाइटी (MWS) ने 6 साल पहले पूर्व सीएम को पत्र लिखकर अपील की थी कि सूबे के मदरसों से संस्कृत के शिक्षकों को भी जाए ताकि वहां के सिलेबस में संस्कृत को जोड़ा जा सके, लेकिन इसे अव्यावहारिक बताते हुए त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मदरसों में संस्कृत पढ़ाने से इनकार कर दिया था.
उत्तराखंड के मदरसों में संस्कृत पढ़ाई जाएगी. उत्तराखंड के बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने आज तक से बातचीत में जानकारी दी कि उत्तराखंड के मदरसों में अब संस्कृत की शिक्षा दी जाएगी. उन्होंने कहा मदरसों में NCERT का पाठ्यक्रम लागू होने जा रहा है. इसमें अन्य विषयों के साथ संस्कृत की शिक्षा भी दी जाएगी. बोर्ड अध्यक्ष ने कहा अगर देवभूमि उत्तराखंड में संस्कृत नहीं पढ़ाई जाएगी तो कहां पढ़ाई जाएगी. मुस्लिम समाज के लोग भी मदरसों में अपग्रेड चाहते हैं, वे बदलाव से खुश हैं.
6 साल पहले उठी थी मदरसों में संस्कृत की मांग
दरअसल, उत्तराखंड के मदरसों में संस्कृत पढ़ाने की मांग छ साल पहले मदरसा वेलफेयर सोसाइटी (MWS) ने उठाई थी. एमडब्ल्यूएस के सदस्यों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र लिखकर इसकी मांग की थी. सोसाइटी ने पूर्व सीएम को पत्र लिखकर अपील की थी कि सूबे के मदरसों से संस्कृत के शिक्षकों को भी जाए ताकि वहां के सिलेबस में संस्कृत को जोड़ा जा सके, लेकिन इसे अव्यावहारिक बताते हुए त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मदरसों में संस्कृत पढ़ाने से इनकार कर दिया था.
संस्कृत में PhD कर चुकी रजिया सुल्ताना का दिया उदाहरण
एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2017 में उत्तराखंड के 207 मदरसों में संस्कृत पढ़ाने की मांग की गई थी. हालांकि उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने फिलहाल कुल 117 मदरसों में संस्कृत पढ़ाए जाने की घोषणा की है. उन्होंने संस्कृत में पीएचडी कर चुकी मुस्लिम लड़की रजिया सुल्ताना का उदाहरण दिया. साथ ही बताया कि वे अब संस्कृत में कुरान का अनुवाद कर रही हैं. रजिया को वक्फ बोर्ड की राज्य स्तरीय शिक्षा समिति में सदस्य बनाने की भी बात कही गई है.
राज्य वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि बोर्ड में रजिस्टर्ड मदरसों को मॉर्डन किया जा रहा है. इसमें बच्चों को स्मार्ट क्लासेस व टेक्निकल नॉलेज के लिए टैबलेट व कंप्यूटर भी मुहैया कराए जाएंगे.

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