
अधिकारियों के तबादलों पर सियासत, निर्वाचन आयोग ने यूपी CEO से मांगी रिपोर्ट
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आयोग ने इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के सीईओ से इन आरोपों की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है. समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि मुरादाबाद जिले के 29-कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र और कानपुर जिले के सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की पोस्टिंग में भेदभाव और राजनीतिकरण किया जा रहा है.
निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) से समाजवादी पार्टी द्वारा अधिकारियों के तबादलों में भेदभाव के आरोपों की जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है.
जानाकारी के मुताबिक, आयोग ने समाजवादी पार्टी के उस प्रतिनिधिमंडल की शिकायत का संज्ञान लिया है, जिसने चुनाव आयोग से मुलाकात कर दावा किया था कि सीसामऊ और कुंदरकी विधानसभा उपचुनाव से पहले जाति विशेष के अधिकारियों को निशाना बनाकर तबादले किए जा रहे हैं.
समाजवादी पार्टी की शिकायत पर निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) से अधिकारियों के तबादलों में जातिगत भेदभाव के आरोपों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है. यह मामला आगामी विधान सभा उपचुनाव से पहले का है, जिसमें समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि कुछ विशेष जातियों के अधिकारियों को निशाना बनाकर उनका तबादला किया जा रहा है.
आयोग ने उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 29-कुंदरकी विधान सभा क्षेत्र (मुरादाबाद जिला) और सीसामऊ विधान सभा क्षेत्र (कानपुर जिला) में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की पोस्टिंग में पक्षपात और राजनीतिकरण हो रहा है. समाजवादी पार्टी का आरोप है कि इन तबादलों के पीछे एक खास राजनीतिक उद्देश्य हो सकता है, जो कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है.
आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सीईओ, उत्तर प्रदेश से तत्काल जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. रिपोर्ट में उन अधिकारियों के तबादलों की पूरी जानकारी शामिल की जाएगी, जो इन आरोपों के तहत सामने आए हैं. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो इस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि मुरादाबाद जिले के 29-कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र और कानपुर जिले के सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की पोस्टिंग में भेदभाव और राजनीतिकरण किया जा रहा है.

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