
'अगर स्टे नहीं लगाया तो सब कुछ छीन लेंगे' EC के फैसले के खिलाफ उद्धव गुट की याचिका सुनने को SC तैयार
AajTak
शिवसेना के नाम और सिंबल की लड़ाई आखिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच ही गई. सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर अर्जेंट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. इस मामले में चुनाव आयोग के आदेश के खिलाफ उद्धव की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट कल दोपहर 3.30 बजे सुनवाई करेगा.
शिवसेना के नाम और सिंबल की लड़ाई आखिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच ही गई. सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर अर्जेंट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. इस मामले में चुनाव आयोग के आदेश के खिलाफ उद्धव की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट कल दोपहर 3.30 बजे सुनवाई करेगा.
सुनवाई के दौरान उद्धव गुट की तरफ वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी. उन्होंने कहा कि पहले ही उद्धव गुट के कार्यालय पर कब्जा किया जा चुका है. अगर इसकी सुनवाई नहीं हुई तो उनके बैंक खाते भी छीन लिए जाएंगे. सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग का आदेश सिर्फ विधान सभा के 33 सदस्यों पर आधारित है.
बता दें कि चुनाव आयोग ने शिवसेना का नाम और पार्टी का सिंबल शिंदे गुट को देने का फैसला किया था, जिसके बाद उद्धव गुट ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. वे सोमवार को ही इस मसले पर संविधान पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई चाहते थे. हालांकि अदालत ने यह कहते हुए सोमवार को सुनवाई नहीं की थी कि अर्जेंट सुनवाई के लिए एक प्रक्रिया है, जिसका पालन किया जाना चाहिए.
शिंदे गुट ने दाखिल की थी कैविएट
शिवसेना का नाम और निशान मिलने से उत्साहित शिंदे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर ये मांग कर दी थी कि बिना उनका पक्ष सुने कोई भी एकतरफा आदेश पारित न किया जाए. उद्धव गुट की नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी के बयान ने पहले ही कयास लगने लगे थे कि उद्धव गुट सुप्रीम कोर्ट जा सकता है. उन्होंने चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा गया था कि अब लोकतंत्र की रक्षा सुप्रीम कोर्ट को ही करनी होगी.
लागातार निशाना साध रहा उद्धव गुट

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









