
'अगर पाकिस्तान को खुश करते हैं ट्रंप, तो...' पूर्व राजदूत ने US-इंडिया डील और रूसी तेल पर दी ये सलाह
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अमेरिका पर दबाव बनाने को लेकर पूर्व राजदूत ने कहा कि ट्रेड डील के बीच में अगर ट्रंप जियो-पॉलिटिकल चीजों को लेकर आते हैं तो भारत को पाकिस्तान को लेकर शर्त रखनी चाहिए.
भारत के पूर्व राजदूत केसी सिंह ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी टैरिफ का इस्तेमाल न केवल व्यापारिक उपकरण के तौर में कर रहा है, बल्कि जियो-पॉलिटिकल दबाव बनाने के लिए भी कर रहा है और उन्होंने सुझाव दिया कि अगर अमेरिका व्यापार को भारत की विदेश नीति से जोड़ता है तो भारत व्यापारिक चर्चाओं में पाकिस्तान का मुद्दा उठाकर जवाब दे सकता है.
दरअसल, ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने पर नई दिल्ली पर लगाए गए 25% टैरिफ को हटा दिया. उनके कार्यकारी आदेश में यह स्पष्ट कर दिया गया कि अमेरिका भारत के व्यापार पर नजर रखेगा और अगर नई दिल्ली मॉस्को से तेल खरीदना फिर से शुरू करती है, तो 25% टैरिफ दोबारा लगा दिया जाएगा.
चीन ने बढ़ाई रूसी तेल की खपत अमेरिका की ओर से कही गई इस बात को लेकर सिंह ने बताया कि भारत द्वारा कम किए गए रूसी तेल की मात्रा को चीन पहले ही एक्वॉयर कर चुका है. इंडिया टुडे में एक पैनल चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि चीन ने रूस से अपना आयात बढ़ा दिया है, वह उस तेल की खरीदारी करने जा रहे हैं, जो भारत पहले ले रहा था. चीन के आयात में 10 लाख बैरल की बढ़ोतरी होगी.
अमेरिका पर डाला जा सकता है दबाव पूर्व राजदूत ने कहा कि ट्रंप चीन जा रहे हैं और वे उनसे बातचीत करेंगे. ट्रंप इसे G2 सम्मेलन कह रहे हैं, वे चीन के साथ बिल्कुल अलग तरह से व्यवहार कर रहे हैं. चीन पर भारी टैरिफ लगाए गए थे, जब चीन ने रेयर मेटल का हवाला देते हए कहा कि हम आपको दुर्लभ धातुओं की आपूर्ति बंद कर देंगे, तो ट्रंप ने उन्हें वापस ले लिया. इसका मतलब यह है कि ट्रंप से निपटने का तरीका यह है कि आपके पास कुछ ऐसा हो, जिससे आप बातचीत कर सकें और जवाबी दबाव डाल सकें.
रूसी तेल को लेकर क्या बोले सिंह? उन्होंने कहा कि भारत निष्क्रिय रहा और इंतजार करता रहा, फिर अचानक हमने ये डील कर दिया और न तो पूरी डिटेल उपलब्ध है और न ही भारत पूरी तरह से यह समझाने को तैयार है. सिंह ने भारत द्वारा तेल की खरीद को यूक्रेन युद्ध समाप्त करने से जोड़ने के तर्क पर सवाल उठाया.
भारत को तेल आयात रोकने के लिए मजबूर करने का औचित्य यूक्रेन युद्ध को रोकने में मदद करना बताया गया है, लेकिन उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध राष्ट्रपति ट्रंप की तुलना में यूरोप को कहीं ज्यादा प्रभावित कर रहा है. यूरोपीय देशों ने आकर मुक्त व्यापार समझौता किया. उन्होंने भारत पर रूस से तेल आयात बंद करने की कोई शर्त नहीं रखी. यूक्रेन युद्ध से सबसे ज्यादा प्रभावित तो यूरोप ही है.

US-Iran War: 'जंग के जिम्मेदार देशों को निपटना होगा...', भारत ने ठुकराई ऑयल रिजर्व जारी करने की अपील
इंटरनेशलन एनर्जी एजेंसी की ओर से भारत से अपील की गई थी कि वह तेल की कीमतों को कम करने के लिए ऑयल रिजर्व जारी करे, जिसे भारत ने ठुकरा दिया है. ऐसा एक रिपोर्ट में दावा किया गया है.

फरवरी के अंत में कच्चे तेल की कीमतें 68 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अमेरिका और इज़रायल के ईरान पर हमले के बाद बढ़कर 110 डॉलर तक पहुंच गई हैं. यदि यह स्थिति इसी तरह बनी रहती है, तो आने वाले एक महीने में तेल की कीमतें 200 डॉलर तक पहुंच सकती हैं. ईरान ने UAE, सऊदी अरब, कतर और ओमान की रिफाइनरी और LNG संयंत्रों पर हमला किया है, जिससे उत्पादन रुक गया है. तेल का ये संकट दुनिया के लिए कितनी बड़ी मुश्किल खड़ी कर देगा? देखें वीडियो.











